रायबरेली पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल बढ़ाने की मांग, प्रधानों ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

विकास कार्यों और जनगणना पर असर पड़ने की आशंका, प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील

रायबरेली जिले में सोमवार को पंचायत प्रतिनिधियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आया। ग्रामीण सत्ता पंचायती राज संगठन के प्रदेश महासचिव अखिलेश यादव के नेतृत्व में सैकड़ों ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी और सिटी मजिस्ट्रेट को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों के कार्यकाल को बढ़ाने की मांग की।

पंचायतों की भूमिका बताई अहम

प्रधानों ने अपने ज्ञापन में कहा कि ग्राम पंचायतें ग्रामीण प्रशासन की सबसे अहम इकाई होती हैं। गांवों में सरकार की योजनाओं को लागू करने की जिम्मेदारी इन्हीं के पास होती है। सड़क, पानी, सफाई, आवास योजना और अन्य कई जरूरी काम पंचायतों के माध्यम से ही पूरे किए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि पंचायत प्रतिनिधि न केवल योजनाओं को लागू करते हैं, बल्कि गांव के लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाने का काम भी करते हैं। इस वजह से उनका सक्रिय रहना बेहद जरूरी है।

चुनाव और जनगणना के बीच अनिश्चितता

ज्ञापन में यह भी बताया गया कि इस समय पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति साफ नहीं है। साथ ही देश में जनगणना जैसे बड़े और महत्वपूर्ण कार्य भी होने हैं। ऐसे में अगर पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हो जाता है और नए चुनाव समय पर नहीं होते, तो गांवों में प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

प्रधानों का कहना है कि इस स्थिति में विकास कार्यों के साथ-साथ जनगणना जैसे राष्ट्रीय कार्यों पर भी असर पड़ेगा, जो देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

विकास कार्य रुकने की जताई चिंता

ग्राम प्रधानों ने यह भी बताया कि इस समय गांवों में कई विकास कार्य चल रहे हैं। इनमें सड़क निर्माण, नाली निर्माण, स्कूलों की मरम्मत और अन्य जरूरी काम शामिल हैं। अगर प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हो गया, तो ये सभी काम बीच में रुक सकते हैं।

इससे गांव के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ेगा और विकास की गति भी धीमी हो जाएगी।

कार्यकाल बढ़ाने की रखी मांग

इन सभी समस्याओं को देखते हुए संगठन ने मांग की है कि वर्तमान ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल तब तक बढ़ाया जाए, जब तक नए प्रतिनिधि चुने नहीं जाते और अपना कार्यभार नहीं संभाल लेते।

उनका कहना है कि इससे गांवों में किसी भी तरह की प्रशासनिक कमी नहीं आएगी और कामकाज सामान्य रूप से चलता रहेगा।

प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार देने का सुझाव

ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया कि यदि कार्यकाल बढ़ाया जाता है, तो उस दौरान पंचायत प्रतिनिधियों को उनके सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार भी दिए जाएं। इससे वे पहले की तरह योजनाओं को मंजूरी दे सकेंगे और विकास कार्यों को जारी रख पाएंगे।

प्रधानों का मानना है कि बिना अधिकार दिए कार्यकाल बढ़ाने का कोई खास फायदा नहीं होगा, इसलिए दोनों चीजें साथ में जरूरी हैं।

बड़ी संख्या में प्रधान रहे मौजूद

इस मौके पर जिले के सभी विकास खंडों से बड़ी संख्या में ग्राम प्रधान और पंचायत प्रतिनिधि मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखा और उम्मीद जताई कि सरकार जल्द ही इस पर सकारात्मक फैसला लेगी।

प्रधानों ने साफ किया कि उनकी यह मांग किसी निजी लाभ के लिए नहीं है, बल्कि यह पूरी तरह से गांवों के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए है।

आगे क्या होगा, इस पर टिकी नजर

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और सरकार इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान दिया गया, तो गांवों में विकास कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रह सकते हैं।

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