Sanjay Raut Questioned Putin India Visit: रूस (Russia) के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) के हालिया भारत दौरे ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद और सामना के कार्यकारी संपादक संजय राऊत (Sanjay Raut) ने इस दौरे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा प्रहार किया है। राऊत ने सुरक्षा व्यवस्था से लेकर लोकतांत्रिक परंपराओं और भारत की विदेश नीति तक कई गंभीर सवाल उठाए हैं। साथ ही, रूस-भारत संबंधों की मौजूदा दिशा को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई है। आखिर संजय राऊत ने ऐसा क्या कहा, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी, पूरा मामला क्या है, जानते हैं विस्तार से…
पुतिन का भारत दौरा और सुरक्षा पर सवाल/Sanjay Raut Questioned Putin India Visit
संजय राऊत (Sanjay Raut) ने अपने साप्ताहिक कॉलम में लिखा कि 4 दिसंबर को राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (President Vladimir Putin) के दिल्ली (Delhi) आगमन के दौरान राजधानी की कई प्रमुख सड़कें पूरी तरह बंद कर दी गईं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) की आवाजाही के कारण पहले ही दिल्ली में जाम आम बात है, ऐसे में पुतिन का दौरा आम लोगों के लिए और मुश्किलें लेकर आया। शाह कृष्णा मेनन रोड (Shah Krishna Menon Road) और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक ठप रहने से हजारों लोग प्रभावित हुए। राऊत के अनुसार, वीवीआईपी मूवमेंट के नाम पर जनता को बार-बार असुविधा झेलनी पड़ रही है, जो लोकतांत्रिक शासन की भावना के खिलाफ है।

‘आरती राजनीति’ और राष्ट्रपति भवन का कालीन विवाद
राऊत ने अपने लेख में भाजपा (BJP) पर तंज कसते हुए लिखा कि पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की आरती उतारी गई और अब रूसी राष्ट्रपति पुतिन की। उन्होंने इसे मजेदार लेकिन चिंताजनक राजनीतिक संस्कृति बताया। इसके साथ ही राष्ट्रपति भवन (Rashtrapati Bhavan) में कालीन को लेकर उठे विवाद का भी जिक्र किया गया। राऊत ने सवाल उठाया कि इतने बड़े विदेशी मेहमान के स्वागत के लिए क्या राष्ट्रपति भवन में पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं थीं, जो तंबूवालों से कालीन किराए पर लेने पड़े। उनके मुताबिक, यह स्थिति देश की तैयारियों और व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। राऊत का आरोप है कि सत्ता प्रतिष्ठान प्रतीकात्मक आयोजनों पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, जबकि मूलभूत मुद्दे पीछे छूट रहे हैं।
विदेश नीति पर हमला, ‘रूस अब चीन के करीब’
संजय राऊत (Sanjay Raut) ने भारत (India) की विदेश नीति पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि रूस कभी भारत का सबसे भरोसेमंद दोस्त हुआ करता था, लेकिन मौजूदा हालात में वह चीन (China) के ज्यादा करीब नजर आता है। राऊत ने लिखा कि अमेरिका (USA) और रूस—दोनों ही भारत को अपने हितों के तहत हथियार और तेल बेचने में रुचि रखते हैं। उनका आरोप है कि कमजोर अर्थव्यवस्था के चलते भारत का शोषण किया जा रहा है। इसके अलावा, पुतिन के दौरे के दौरान देश के कई हवाई अड्डों (Airports) पर अव्यवस्था की भी उन्होंने आलोचना की, जहां उड़ानें रद्द हुईं और हजारों यात्री फंसे रहे। राऊत के मुताबिक, दुनिया ने दोस्ती की तस्वीरों के साथ भारत की बदहाल व्यवस्थाएं भी देखीं।
लोकतंत्र और विपक्ष को नजरअंदाज करने का आरोप
अपने लेख में संजय राऊत (Sanjay Raut) ने लोकतंत्र को लेकर सबसे गंभीर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति पुतिन (President Vladimir Putin) के सम्मान में आयोजित भोज में विपक्षी नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया। राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के बयान का हवाला देते हुए राऊत ने कहा कि पहले विदेशी मेहमान विपक्ष के नेताओं से भी मुलाकात करते थे, लेकिन मोदी सरकार में यह परंपरा खत्म कर दी गई है। उन्होंने रूस (Russia) और भारत (India) की तुलना करते हुए लिखा कि रूस में विपक्ष लगभग समाप्त हो चुका है और भारत भी उसी रास्ते पर बढ़ता दिख रहा है। राऊत का दावा है कि विपक्ष की आवाज दबाकर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है, जो देश के भविष्य के लिए खतरनाक संकेत है।










