Saraswati Puja Mandu School: झारखंड के रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड में स्थित राजकीयकृत मध्य विद्यालय मांडू में एक खास दिन था। यहां 23 जनवरी को बसंत पंचमी के पावन अवसर पर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की गई और साथ ही वीर सपूत नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती भी हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। यह दिन स्कूल के लिए बहुत खास रहा क्योंकि एक तरफ विद्या की देवी मां सरस्वती का आशीर्वाद लिया गया और दूसरी तरफ देश के स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी को श्रद्धांजलि दी गई। पूरे स्कूल परिसर में उत्साह का माहौल था और बच्चे-शिक्षक सब मिलकर इस पवित्र कार्यक्रम में शामिल हुए।
मां सरस्वती की पूजा से शुरू हुआ कार्यक्रम
सुबह सबसे पहले मां सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर के सामने पूजा-अर्चना की गई। बच्चे सफेद या पीले कपड़े पहनकर आए थे और हाथ में किताबें, कलम लेकर मां से विद्या, बुद्धि और अच्छी वाणी का आशीर्वाद मांगा। बसंत पंचमी का यह महापर्व मां सरस्वती को समर्पित है। मान्यता है कि मां सरस्वती के आशीर्वाद से साधक की विद्या बढ़ती है, बुद्धि तेज होती है और कला में सफलता मिलती है। उनकी कृपा से वाणी में मधुरता आती है, मन शुद्ध रहता है और व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है। स्कूल में बच्चों ने भक्ति गीत गाए, मंत्र जपे और फूल-चावल चढ़ाकर मां का पूजन किया। यह पूजा न सिर्फ धार्मिक थी बल्कि बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि जगाने वाली भी थी।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि
पूजा के बाद कार्यक्रम का दूसरा हिस्सा शुरू हुआ जहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए गए। नेताजी का जन्म 23 जनवरी 1897 को हुआ था और हर साल इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह दिवस उनके साहस, देशभक्ति और आजादी के लिए किए गए बलिदान को याद करने का दिन है। स्कूल में बच्चों ने नेताजी की जीवनी पर छोटे-छोटे भाषण दिए और उनके प्रसिद्ध नारे “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” को जोर-शोर से दोहराया। यह नारा आज भी युवाओं में जोश भरता है और देशसेवा की भावना जगाता है।
स्कूल प्रभारी चंद्रशेखर प्रसाद का संदेश
स्कूल के प्रभारी चंद्रशेखर प्रसाद ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन दो महत्वपूर्ण चीजों का प्रतीक है – एक तरफ विद्या भक्ति और दूसरी तरफ देशभक्ति। दोनों का अपना-अपना विशेष महत्व है। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस के योगदान की सराहना की और कहा कि उनके विचारों के करीब पहुंचना ही बड़ी बात है। नेताजी ने देश के लिए जो किया, वह हमेशा प्रेरणा देता रहेगा।
शिक्षा के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में बच्चे बहुत प्रभावित हो रहे हैं। आज का माहौल और परिवेश ऐसा है कि छोटे बच्चे समझ नहीं पाते कि सही शिक्षा क्या है और कहां से मिलनी चाहिए। शिक्षा हर जगह से मिलती है लेकिन सही और गलत की पहचान करना बहुत जरूरी है। हर अभिभावक को इसे समझना चाहिए और बच्चों को सही दिशा दिखानी चाहिए।
शिक्षक अनिल रजक की प्रेरक बातें
शिक्षक अनिल रजक ने नेताजी का प्रसिद्ध नारा “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” लगाकर सबको जोश से भर दिया। उन्होंने कहा कि बलिदान का मतलब सिर्फ जान कुर्बान करना नहीं है। बल्कि समाज को सुधारना, अच्छे काम करना भी बलिदान है। समाज सुधरेगा तो राज्य सुधरेगा और फिर देश मजबूत बनेगा। आज की पीढ़ी नेताजी के आदर्शों से दूर हो रही है। इसलिए हमें उनके विचारों को धरातल पर लाकर बच्चों के सामने रखना होगा ताकि वे उनसे प्रेरणा लें और देश के लिए कुछ करें।
कार्यक्रम में शामिल हुए लोग
इस खास मौके पर स्कूल प्रभारी चंद्रशेखर प्रसाद के अलावा शिक्षक अनिल रजक, अजय कुमार गुप्ता, शकुंतला कुमारी, सुजात अंसारी, धर्मदास, सिंधु देवी, नंदलाल पांडे और कई अन्य शिक्षक मौजूद थे। विद्यार्थियों में आदित्य कुमार, नैतिक कुमार, रमन कुमार, आरसी, फरहीन, आलिया, प्रतिज्ञा कुमारी, विकास कुमार समेत कई बच्चे उत्साह से शामिल हुए। सबने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
निष्कर्ष
यह कार्यक्रम सिर्फ पूजा या जयंती मनाने तक सीमित नहीं रहा। यह बच्चों को पढ़ाई के महत्व और देशभक्ति की भावना सिखाने वाला था। मांडू के इस स्कूल ने दिखाया कि शिक्षा और देशसेवा साथ-साथ चल सकती हैं। मां सरस्वती से विद्या मांगना और नेताजी से प्रेरणा लेना – दोनों ही आज के युवाओं के लिए जरूरी हैं। ऐसे कार्यक्रम स्कूलों में होने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी मजबूत और जागरूक बने।










