Sim Binding Rule Explained: भारत सरकार द्वारा मैसेजिंग ऐप्स पर लागू किया गया नया ‘सिम बाइंडिंग’ नियम देश के डिजिटल सुरक्षा ढांचे में सबसे बड़े बदलावों में से एक माना जा रहा है। व्हाट्सएप (WhatsApp), टेलीग्राम (Telegram) और सिग्नल (Signal) जैसे लोकप्रिय प्लेटफॉर्म को अब उसी डिवाइस में चलाया जा सकेगा जिसमें रजिस्टर्ड सिम मौजूद हो। दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications) ने साफ कर दिया है कि अगले 90 दिनों में यह नियम लागू हो जाएगा और इसके बाद बिना सिम वाले डिवाइस में कोई भी मैसेजिंग ऐप काम नहीं करेगा। साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय डिजिटल फ्रॉड को रोकने के लिए उठाया गया यह कदम आने वाले दिनों में उपयोगकर्ताओं की ऑनलाइन आदतों को पूरी तरह बदल सकता है। तो चलिए, जानते हैं पूरा मामला क्या है, विस्तार से…
सिम बाइंडिंग नियम क्यों लाया गया?Sim Binding Rule Explained
हाल के वर्षों में भारत में साइबर अपराध और डिजिटल फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2024 में ही देश को लगभग 22,800 करोड़ रुपये का नुकसान डिजिटल धोखाधड़ी के कारण हुआ। सीमा पार बैठे साइबर अपराधी भारतीय उपभोक्ताओं को टारगेट करने के लिए मैसेजिंग ऐप्स का सबसे अधिक इस्तेमाल करते हैं। इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए सरकार ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए ‘सिम बाइंडिंग’ नियम को अनिवार्य किया। इस नियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे की प्रोफ़ाइल को अलग डिवाइस में लॉग इन न कर सके। एक सिम—एक डिवाइस—एक लॉगिन की अवधारणा डिजिटल अपराधों पर नियंत्रण के लिए एक नई दीवार की तरह काम करेगी। सरकार का दावा है कि यह कदम देश की साइबर सुरक्षा को एक नए स्तर पर ले जाएगा।

बिना सिम बंद होंगे व्हाट्सएप-टेलीग्राम
दूरसंचार विभाग (DOT) ने 28 नवंबर को नोटिस जारी करते हुए स्पष्ट किया कि ‘सिम बाइंडिंग’ नियम लागू होने के बाद मैसेजिंग ऐप केवल उसी डिवाइस में काम करेंगे, जिसमें रजिस्टर्ड सिम मौजूद है। यदि सिम को फोन से निकाल दिया जाता है, तो कुछ समय बाद ऐप ऑटोमैटिक लॉग आउट हो जाएगा। इतना ही नहीं, 90 दिन पूरे होने के बाद सभी मैसेजिंग ऐप हर 6 घंटे में अपने आप री-लॉगइन प्रक्रिया शुरू करेंगे ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि डिवाइस में वही सिम मौजूद है। इस ऑटो-चेक सिस्टम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ऐप का दुरुपयोग किसी दूसरे फोन में न हो सके। इस नियम का प्रभाव व्हाट्सएप, टेलीग्राम, जियोचैट, शेयरचैट, सिग्नल और स्नैपचैट सहित सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पड़ेगा।
कंपनियों को 120 दिनों में रिपोर्ट देने का आदेश
सरकार ने सभी मैसेजिंग सर्विस प्रदाताओं को निर्देश दिया है कि वे नए नियमों के अनुसार तकनीकी बदलाव 120 दिनों के भीतर पूरा करें और अपनी प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। दूरसंचार विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिशानिर्देशों का पालन न करने पर कंपनियों के खिलाफ दूरसंचार अधिनियम 2023 और साइबर सुरक्षा नियमों के तहत कार्रवाई होगी। हालांकि कुछ कंपनियों ने लॉगिन मॉडल में बड़े बदलाव से जुड़े तकनीकी और प्राइवेसी सवाल उठाए हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि यह कदम पूरी तरह उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के लिए है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि सिम बाइंडिंग से उन धोखेबाज़ों पर रोक लगेगी जो चोरी किए गए प्रोफाइल, क्लोन किए गए नंबर या वीपीएन आधारित लोकेशन से फर्जी अकाउंट चलाते थे।
डिजिटल सुरक्षा ढांचे में बड़ा बदलाव
नए नियम लागू होने के बाद देश में डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था अधिक केंद्रीकृत और मजबूत होने की उम्मीद है। उपयोगकर्ताओं को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका सिम हमेशा उसी फोन में मौजूद रहे, जिसमें मैसेजिंग ऐप लॉगिन किया गया है। ऐप कंपनियाँ बैकएंड में ऐसा सिस्टम तैयार कर रही हैं जो लगातार सिम–डिवाइस मेल की निगरानी करेगा। आने वाले महीनों में सरकार साइबर सुरक्षा से जुड़े और कई सुधार लागू कर सकती है, जिनमें एंड-टू-एंड इंटेलिजेंस मॉनिटरिंग और अंतरराष्ट्रीय नंबरों पर सख्त जांच शामिल हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम डिजिटल फ्रॉड पर बड़ी चोट साबित हो सकता है, लेकिन इससे यूजर्स की स्वतंत्रता और मल्टी-डिवाइस लॉगिन मॉडल में बदलाव जरूर देखने को मिलेंगे। आने वाले समय में यह नियम भारत के डिजिटल इकोसिस्टम को नई दिशा देगा।










