UGC Equity Regulations 2026: UGC कानून को लेकर फिलहाल देश में काफी तनावपूर्ण माहौल चल रहा है, अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय (allahabad vishwavidyalaya) के छात्र भी धरना प्रदर्शन पर आ गए हैं, पार्टिया तय कर ले 85% या 3%! हम कदम वापस नहीं लेंगे! यह प्रदर्शन UGC के नए समानता नियमों (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) से जुड़ा हुआ है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय, जिसे सदियों से ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ कहा जाता है, अब छात्रों के बड़े प्रदर्शन का केंद्र बन चुका है। यहां सैकड़ों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और मजबूत आवाज उठा रहे हैं।
UGC के नए नियम क्या कहते हैं?/UGC Equity Regulations 2026
UGC ने 2026 के लिए नए नियम बनाए हैं, जिनमें हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में Equality Cell या समानता समिति बनाना जरूरी है। इसका उद्देश्य जाति, धर्म, लिंग या अन्य आधार पर हमारे साथ होने वाले भेदभाव को रोकना है। पिछड़े वर्गों (SC, ST, OBC) के सभी छात्रों को सुरक्षा और समान मौका मिलना चाहिए, यही मकसद है। कुछ लोग इसे बहुजन समाज (85% आबादी) के लिए बड़ा कदम मानते हैं, क्योंकि यह शिक्षा में पुरानी असमानताओं को खत्म करने की कोशिश है। लेकिन विरोध करने वाले इसे ‘रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन’ या जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताते हैं। उनका कहना है कि इससे कैंपस में जातीय तनाव बढ़ेगा।

लाहाबाद यूनिवर्सिटी में क्या हो रहा है?
प्रयागराज (Prayagraj) के इलाहाबाद विश्वविद्यालय (allahabad vishwavidyalaya) के छात्र जोरदार प्रदर्शन कर रहे हैं। पैदल मार्च निकाला जा रहा है और जोर जोर से नारे लगाए जा रहे हैं, वे मांग कर रहे हैं कि ये नियम तुरंत वापस लिए जाएं। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए और कहा कि अगर सरकार नहीं मानी तो आंदोलन और तेज होगा। उनका स्पष्ट कहना है पार्टियां फैसला लें, 85% बहुजन समाज के साथ हैं या सिर्फ 3% (सवर्ण) के साथ? हम पीछे नहीं हटेंगे!
85% vs 3% का नारा क्यों?
यह नारा बहुजन समाज की एकजुटता दिखाता है। भारत में SC, ST, OBC और अन्य पिछड़े वर्ग मिलाकर लगभग 85% आबादी है। समर्थक कहते हैं कि UGC नियम इन 85% छात्रों की रक्षा करेंगे, उन्हें बेहतर शिक्षा और सुरक्षा देंगे। विरोध करने वाले ज्यादातर जनरल कैटेगरी के हैं, जिन्हें लगता है कि नियम उनके खिलाफ भेदभाव पैदा करेंगे। सोशल मीडिया पर बहस तेज है – एक तरफ बहुजन नेता और छात्र समर्थन में बोल रहे हैं, दूसरी तरफ सवर्ण संगठन विरोध कर रहे हैं। मायावती जैसी नेताओं ने विरोध को ‘जातिवादी सोच’ बताया है।
सुप्रीम कोर्ट और राजनीतिक हलचल
विवाद इतना बड़ा हो गया कि सुप्रीम कोर्ट ने UGC नियमों पर अस्थायी रोक लगा दी। केंद्र को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई 19 मार्च तय की। यूपी में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं, यहां तक कि कुछ BJP कार्यकर्ताओं ने भी विरोध में इस्तीफा दे दिया। लेकिन बहुजन पक्ष कह रहा है कि 85% की आवाज दबाई नहीं जा सकती। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी का इतिहास रहा है आंदोलनों का – फीस वृद्धि, छात्रसंघ चुनाव से लेकर अब UGC तक। यह यूनिवर्सिटी हमेशा से सामाजिक बदलाव की आवाज उठाती रही है।
निष्कर्ष
यह आंदोलन सिर्फ इलाहाबाद तक सीमित नहीं है, पूरे यूपी और देश में फैल रहा है। छात्र कह रहे हैं – हम कदम वापस नहीं लेंगे! अगर नियम लागू हुए तो बहुजन छात्रों को फायदा होगा, लेकिन अगर वापस लिए गए तो विरोध और तेज होगा। केंद्र सरकार को अब फैसला लेना होगा – बहुमत (85%) की भावना का सम्मान करे या अल्पमत (3%) की। समय बताएगा कि ‘पूरब का ऑक्सफोर्ड’ इस लड़ाई में क्या रोल निभाएगा। लेकिन एक बात साफ है – बहुजन समाज एकजुट है और अपनी आवाज नहीं दबने देगा!










