Asha Workers Stage Strong Protest : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) आशा वर्कर्स यूनियन (Asha Workers Union) के बैनर तले सैकड़ों आशा कार्यकर्ताओं (आशा बहनों) ने आज शुक्रवार को रायबरेली जनपद के कलेक्ट्रेट परिसर में डीएम ऑफिस के ठीक सामने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन की अध्यक्षता नेता विजय विद्रोही ने की। प्रदर्शनकारियों ने “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे लगाते हुए अपनी लंबित मांगों को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन सौंपा और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (Asha Workers Union) की रायबरेली जिला अध्यक्ष गीता मिश्रा ने बताया कि आशा कार्यकर्ता 15 दिसंबर 2025 से ही अनिश्चितकालीन हड़ताल और धरने पर हैं। उन्होंने कहा, “हम लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार हमारी कोई मांग नहीं सुन रही। हमारी बहनों का जीवन असुरक्षित है और सम्मानजनक गुजारा मुश्किल हो रहा है। जब तक प्रशासन हमसे बात नहीं करता और मांगें नहीं मानता, तब तक धरना जारी रहेगा। कोई समझौता नहीं होगा।”

प्रदर्शन में शामिल आशा कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- आशा कार्यकर्ताओं को राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
- मानदेय को बढ़ाकर 21,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए (वर्तमान में बहुत कम मानदेय मिलता है, जो परिवार चलाने के लिए अपर्याप्त है)।
- आशा बहनों को बीमा (जैसे ESI, EPF आदि) की सुविधा प्रदान की जाए।
- ग्रेच्युटी (Gratuity) का प्रावधान किया जाए।
- मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) दिया जाए, ताकि उनके जीवन और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
- अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ और कार्यभार के अनुसार उचित सुविधाएं।
यह प्रदर्शन उत्तर प्रदेश भर में चल रहे आशा वर्कर्स (Asha Workers) आंदोलन का हिस्सा है, जिसमें आशा कार्यकर्ता लंबे समय से अपनी सेवाओं के बदले उचित मानदेय, स्थायी दर्जा और सुरक्षा की मांग कर रही हैं। नेता विजय विद्रोही के नेतृत्व में यह प्रदर्शन शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ रहा, और प्रशासन से वार्ता की अपील की गई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज होगा, जिसमें लखनऊ तक मार्च या बड़े स्तर पर विरोध शामिल हो सकता है। जिला प्रशासन ने ज्ञापन प्राप्त कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन कार्यकर्ता सतर्क हैं और धरना जारी रखने की तैयारी में हैं।
यह घटना आशा कार्यकर्ताओं की कठिन परिस्थितियों और उनके योगदान को सम्मान देने की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है, क्योंकि ये महिलाएं ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं।










