Anuj Chaudhary FIR Sambhal : संभल हिंसा में बड़ा ट्विस्ट, 22 पुलिसकर्मियों पर FIR के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती

Anuj Chaudhary FIR Sambhal : अनुज चौधरी समेत 22 पुलिसवालों पर FIR रद्द कराने की मांग! एसपी का दावा- आरोप बेबुनियाद

Anuj Chaudhary FIR Sambhal : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पिछले साल नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा का एक पुराना मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है। इस बार सरकार ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के 9 जनवरी 2026 के आदेश को निरस्त कराने के लिए राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल कर दी है। इस आदेश में तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी (अब एएसपी फिरोजाबाद), तत्कालीन कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और अन्य 20 पुलिसकर्मियों (कुल 22) के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था।

हालांकि हाईकोर्ट में इस याचिका पर अभी सुनवाई बाकी है। दोनों तरफ से मजबूत दावे किए जा रहे हैं, जिससे मामला और जटिल हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

सब कुछ 24 नवंबर 2024 को शुरू हुआ, जब संभल की शाही जामा मस्जिद (जिसे कुछ लोग हरिहर मंदिर भी बताते हैं) के सर्वे के दौरान इलाके में तनाव बढ़ गया। भीड़ जमा हो गई और हिंसा भड़क उठी। इस दौरान पथराव, आंसू गैस और अफरा-तफरी मची। हिंसा में कई लोग घायल हुए और कुछ मौतें भी हुईं।

खग्गू सराय (या नई सराय) निवासी यामीन ने सीजेएम कोर्ट में अर्जी देकर आरोप लगाया कि उनका बेटा मोहम्मद आलम (उम्र करीब 23-24 साल) उस सुबह बिस्कुट और पापे (रस्क) बेचने के लिए ठेला लेकर घर से निकला था। जामा मस्जिद के पास पहुंचते ही पुलिस ने भीड़ पर गोलियां चलानी शुरू कर दीं। आलम भागने लगा तो पुलिस ने उसे निशाना बनाया। उसके शरीर में तीन गोलियां लगीं। परिवार का दावा है कि आलम ने छिपकर इलाज कराया, बाद में मेठर (या अन्य जगह) में ऑपरेशन हुआ। गोली लगने की बात आलम ने खुद परिवार को बताई।

यामीन की अर्जी पर सुनवाई के बाद सीजेएम विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी 2026 को पुलिस को FIR दर्ज करने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि मेडिकल रिपोर्ट्स में ‘गनशॉट वाउंड’ और ‘पुलिस फायरिंग इन रायट’ का जिक्र है, जो पुलिस की रिपोर्ट से मेल नहीं खाता। कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारी अपराध करने पर ‘ऑफिशियल ड्यूटी’ का ढाल नहीं बना सकते।

पुलिस और सरकार की तरफ से क्या कहा गया?

संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने स्पष्ट कहा कि आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। पुलिस ने कोई गोली नहीं चलाई। आलम खुद बवाल में आरोपी है और हिंसा के एक केस में उसका नाम आया है। सरकार ने तुरंत हाईकोर्ट में रिवीजन दाखिल किया ताकि सीजेएम के आदेश को रद्द करवाया जा सके।

नामजद दोनों अधिकारी भी हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी (अब एएसपी फिरोजाबाद) और अनुज तोमर (अब चंदौसी कोतवाली में) ने निजी वकील के जरिए अलग याचिका दाखिल की है। वे आदेश निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि FIR अभी तक दर्ज नहीं हुई क्योंकि मामला अदालत में है।

इससे जुड़े अन्य घटनाक्रम

  • सीजेएम के आदेश के कुछ दिनों बाद ही विभांशु सुधीर का तबादला सुल्तानपुर हो गया, जिससे विवाद बढ़ा। वकीलों ने इसे न्यायिक स्वतंत्रता पर हमला बताया।
  • आलम को भी हिंसा के एक केस में आरोपी बनाया गया था, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2026 को उसे 25 फरवरी तक अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी।
  • संभल हिंसा की जांच रिपोर्ट में इसे पूर्व नियोजित बताया गया, जिसमें कुछ नेताओं की भूमिका का जिक्र है।

निष्कर्ष

यह मामला अब हाईकोर्ट में है। अगर रिवीजन मंजूर हुआ तो FIR का आदेश रद्द हो सकता है। अगर नहीं, तो पुलिस को 22 कर्मचारियों के खिलाफ जांच शुरू करनी होगी। दोनों पक्ष मजबूत सबूत पेश करने की तैयारी में हैं।

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