Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगाई गई। बैठक में कुल 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिनमें सबसे बड़ा फैसला ओबीसी आयोग के गठन को लेकर रहा। इस फैसले के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने की राह लगभग साफ मानी जा रही है। लंबे समय से पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण को लेकर बनी कानूनी और प्रशासनिक बाधाएं अब दूर होती दिखाई दे रही हैं।
सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि पंचायत चुनावों की तैयारियां अब तेजी से आगे बढ़ेंगी और राजनीतिक दल भी गांव की राजनीति में सक्रिय होने लगेंगे।

ओबीसी आरक्षण बना था सबसे बड़ा मुद्दा
प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर सबसे बड़ा विवाद अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण को लेकर था। पिछली बार हाईकोर्ट की ओर से ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी किए बिना आरक्षण लागू करने पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सरकार पर आयोग गठन और सर्वे प्रक्रिया पूरी करने का दबाव बढ़ गया था।
अब योगी सरकार ने ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी देकर यह संकेत दे दिया है कि पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था को कानूनी तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। आयोग पंचायत स्तर पर ओबीसी आबादी और प्रतिनिधित्व का अध्ययन कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
जल्द घोषित हो सकता है पंचायत चुनाव कार्यक्रम
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आयोग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर तैयारी तेज कर सकता है। चुनावी सरगर्मियों के बीच गांव-गांव में राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
बीजेपी समेत सभी प्रमुख दल अब ग्रामीण वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम शुरू कर सकते हैं। पंचायत चुनावों को आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।
कैबिनेट बैठक में अन्य महत्वपूर्ण फैसले भी
कैबिनेट बैठक में सिर्फ ओबीसी आयोग ही नहीं, बल्कि कई विकास और प्रशासनिक प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। सरकार ने बुनियादी सुविधाओं, प्रशासनिक सुधारों और विभिन्न विभागों से जुड़े फैसलों पर भी सहमति जताई। हालांकि सबसे अधिक चर्चा पंचायत चुनाव से जुड़े फैसले की ही रही।
सरकार का कहना है कि सभी संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए पंचायत चुनाव कराए जाएंगे ताकि भविष्य में किसी प्रकार का कानूनी विवाद न खड़ा हो।










