Sambhal : हिंदू सम्मेलन में समाज, संस्कृति, पर्यावरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ

Sambhal : सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित कर समरस, स्वाभिमानी और कर्तव्यनिष्ठ भारत के निर्माण की दिशा में प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिन्दू समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता रही। भारतमाता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवम गणेश वंदना के बाद विभिन्न विद्यालयों के द्वारा सांस्कृतिक एवं देशभक्ति के कार्यक्रम प्रस्तुत किये गए।

विभाग प्रचारक शरद जी ने कहा समाज के प्रत्येक व्यक्ति का अपना अपना महत्व हैं जैसे मनुष्य के शरीर के विभिन्न अंगों का अपना महत्व है। उसी प्रकार सभी हिन्दुओं को संगठित होकर भारत को बचाए रखना हैं, इसलिये ही पूज्य डॉ हेडगेवारजी ने संघ की स्थापना की थी। संघ व्यक्ति का निर्माण करता हैं जब देश मे प्राकृतिक आपदा आती है तो देश और समाज की सेवा के लिये संघ का स्वयंसेवक खड़ा रहता हैं। प्रत्येक हिन्दू को प्रतिदिन अपने परिवार के साथ ईश्वर की पूजा करनी चाहिए और परिवार के सदस्यों को संघ की शाखा में भेजे, जिससे निःशुल्क राष्ट्र की सेवा के लिये स्वयंसेवक तैयार होगा। वंदेमातरम को 150 वर्ष पूरे हुए हैं जिन लोगों को अपने राष्ट्र के गान से परेशानी है ऐसे लोगों को देश में रहने का अधिकार नहीं हैं।

मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर डॉ स्वामी प्रेमानन्द महाराज ,ने सम्बोधित करते हुए कहा कि संघ के स्थापना वर्ष के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हिन्दू सम्मेलन के आयोजनों से वर्तमान परिवेश में हिंदू संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। वर्तमान परिदृश्य के विषय के अनुरूप आजकल प्रायः धर्मांतरण हो रहा है समाज में जाति के नाम पर, लव जिहाद के नाम पर धर्मांतरण हो रहे हैं जिसके कारण हिंदुओं के साथ आघात हो रहा हैं। संघ अपनी शाखों और विभिन्न अनुषांगिक संगठनों के माध्यम से जन-जन तक पहुंचकर सेवा कार्य करता है। जब मनुष्य की संघ द्वारा संचालित विद्या भारती के विद्यालयों में शिक्षा होती है तो सेवा आपका होना स्वाभाविक है इसलिए अपनी संस्कृति को पहचाने और ईश्वरीय आस्था में लगे। हम सभी मनुष्य अशुद्ध पैदा होते हैं लेकिन जब हमारे अंदर संस्कार डाल दिए जाते हैं तो हम सच्चे सनातनी बनते हैं। हिंदू धर्म को विश्व में पूर्व क्षेत्र भी स्वीकार कर रहा है इसलिए हम जगतगुरु हैं हमें संघ की शाखा में और जहां पर भी ज्ञान मिले जाना चाहिए।

मुख्य वक्ता प्रान्त सेवा प्रमुख कुलदीप ने कहा कि समाज जीवन में समय अनुकूल परिवर्तन होना चाहिए। हमें पांच बिंदुओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रहित में अपने जीवन में अपेक्षित परिवर्तन लाना उपयोगी रहेगा। सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व आधारित जीवन, नागरिक कर्तव्यबोध और शिष्टाचार। जब हम वर्तमान परिदृश्य का विचार करते हैं तो भारत का भविष्य उज्जवल दिखाई देता है लेकिन अनेक चुनोतियाँ भी सामने खड़ी है उन चुनौतियों का समाधान भी समाज को संगठित होकर करना होगा, तभी भारत समर्थशाली बनेगा।

अन्त में हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश अग्रवाल गोगी ने सभी का आभार व्यक्त किया। आयोजन समिति के सदस्यों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं उपहार के साथ पुरुस्कृत किया गया। हिंदू सम्मेलन की अध्यक्षता मौसम गुप्ता तथा संचालन कवि सौरभ कान्त शर्मा ने किया।

इस दौरान समिति अध्यक्ष ओम प्रकाश अग्रवाल गोगी, फूलप्रकाश वार्ष्णेय, अंकित जैन, गिरीश रतन, शुभम अग्रवाल, पिंकल वार्ष्णेय, अरविंद वार्ष्णेय, आदित्य दुबे, मनोज कुमार श्याम, कौशल किशोर, अंकुर गुप्ता, शिखर अग्रवाल, मनोज दिवाकर, राजकुमार ठाकरे, अनुज वार्ष्णेय अन्नू, प्रतिभा चौधरी, रेखा वार्ष्णेय, शीला सागर, डॉ मधुपमा, शीनू गुप्ता, रेखा कशयप, कृष्णा शर्मा, डॉ दुर्गा टंडन, अजय अग्रवाल, भगवती, डॉ ओमेंद्र वार्ष्णेय, मोरमुकुट वार्ष्णेय, आमोद वार्ष्णेय, नरेन्द्र आचार्य, अभिनव शर्मा, दिनेश चीनी, निशान्त शर्मा, नवकान्त शर्मा, अनुराग गर्ग, दीपेश वार्ष्णेय, राहुल वार्ष्णेय एआर, विनय अग्रवाल, विवेक चौधरी, शशांक वार्ष्णेय, विकास सनातनी, राजीव सक्सेना, मनोज वार्ष्णेय, परमेश्वर लाल सैनी, गुलाब देवी, डॉ टीएस पाल, डॉ सुगंधा सिंह, अंकुर अग्रवाल, मंजू दिलेर, पप्पू चौधरी, उमेश दिवाकर, सतीश अरोड़ा, तरुण नीरज, चंद्रसेन दिवाकर छोटू, विजय यादव, प्रभात अग्रवाल, अमित सक्सेना, पारस अग्रवाल, चरन सिंह, भूदेव शर्मा, उदय तिवारी, संजीव यादव, अशोक शर्मा, राकेश पाठक, पवन अग्रवाल, संदीप अक्षत, संजय आरओ आदि उपस्थित रहे।

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