सरला बिरला पब्लिक स्कूल में Vatsalyam 2026 का आयोजन, दादा-दादी के सम्मान में सजे रंगारंग कार्यक्रम

Vatsalyam 2026 में सरला बिरला पब्लिक स्कूल रांची के बच्चों ने सत्य, सम्मान, करुणा और कृतज्ञता जैसे जीवन-मूल्यों की शानदार प्रस्तुतियां दीं।

Vatsalyam 2026: सरला बिरला पब्लिक स्कूल, रांची में बुधवार, 12 अगस्त को नर्सरी से केजी-टू तक के बच्चों के लिए ‘वात्सल्यम् 2026 – ग्रैंडपेरेंट्स डे-टू’ का आयोजन किया गया। ‘धरोहर- द लेगेसी ऑफ वैल्यूज’ थीम पर सजे इस कार्यक्रम में बच्चों की मासूम प्रस्तुतियों के साथ दादा-दादी और नाना-नानी के अनुभवों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की अहमियत भी सामने आई। पूरा माहौल आत्मीयता, संस्कार और भारतीय परंपराओं से जुड़ा नजर आया।

दीप प्रज्वलन से शुरू हुआ समारोह, गणेश वंदना ने बांधा समां

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रांची की महापौर रोशनी खलखो रहीं। अतिथियों के स्वागत के बाद मैत्री बंधन और दीप प्रज्वलन हुआ। गणेश वंदना की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक रंग दिया। इसके बाद विद्यालय के हेड बॉय ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत कर स्कूल की उपलब्धियों और प्रमुख गतिविधियों की जानकारी साझा की।

नन्हे कलाकारों ने बताया, संस्कारों की जड़ बचपन में पड़ती है

नर्सरी के बच्चों ने ‘वैल्यू ट्री’ के जरिए एकता, सत्य और दयालुता जैसे मूल्यों को पेड़ की जड़ों से जोड़ा। ‘ए काइंडनेस हीरो’ प्रस्तुति में बच्चों ने यह संदेश दिया कि किसी की मदद करना, चीजें साझा करना और प्यार से बात करना जैसे छोटे प्रयास भी रिश्तों में बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

सत्य से साहस और सम्मान तक, हर प्रस्तुति में दिखा एक संदेश

केजी-वन ए के बच्चों ने सत्यनिष्ठा को केंद्र में रखकर सही बोलने और सही काम करने का महत्व समझाया। केजी-वन बी की प्रस्तुति सहानुभूति पर आधारित रही। वहीं केजी-टू की अलग-अलग कक्षाओं ने मानवता, सम्मान, साहस, क्षमा और कृतज्ञता जैसे मूल्यों को मंच पर उतारा।

प्रस्तुतियों में प्रमुख जीवन-मूल्य रहे:

  • सत्यनिष्ठा, सहानुभूति और मानवता
  • सम्मान, साहस, क्षमा, कृतज्ञता और दयालुता

जन्माष्टमी की झलक ने बढ़ाई सांस्कृतिक रंगत

कार्यक्रम में विशेष जन्माष्टमी उत्सव भी शामिल किया गया। बच्चों की प्रस्तुति ने भारतीय संस्कृति और परंपराओं की सुंदर झलक पेश की। इससे समारोह केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और उनमें छिपे जीवन-संदेशों से जोड़ने का माध्यम भी बना।

महापौर ने कहा- दादा-दादी पीढ़ियों के बीच मजबूत कड़ी

मुख्य अतिथि रोशनी खलखो ने कार्यक्रम की थीम की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण में परिवार और बुजुर्गों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने दादा-दादी और नाना-नानी को पीढ़ियों के बीच जीवंत सेतु बताते हुए पारिवारिक रिश्तों, परंपराओं और अनुभवों को संभालकर रखने की जरूरत पर जोर दिया।

प्राचार्या मनीषा शर्मा ने बताया, असली विरासत मूल्यों की होती है

विद्यालय की प्राचार्या मनीषा शर्मा ने कहा कि ‘वात्सल्यम् 2026’ केवल दादा-दादी के सम्मान का आयोजन नहीं, बल्कि उन मूल्यों को पहचानने का अवसर है जो एक पीढ़ी दूसरी पीढ़ी को सौंपती है। उन्होंने कहा कि सत्य, करुणा, सम्मान, साहस, क्षमा और कृतज्ञता जैसे संस्कार बच्चों के व्यवहार में उतरें, यही इस आयोजन का उद्देश्य है।

राष्ट्रगान के साथ हुआ समापन

कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद ज्ञापन, स्कूल सॉन्ग और राष्ट्रगान के साथ समारोह संपन्न हुआ। बच्चों की प्रस्तुतियों और बुजुर्गों के प्रति सम्मान से भरे इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि बदलते समय में भी परिवार, संस्कार और पीढ़ियों का जुड़ाव समाज की सबसे मजबूत विरासत है।

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