Zomato New Data Sharing Move: अब रेस्टोरेंट्स तक पहुंचेगी कस्टमर इंफो, बदल जाएगा फूड ऑर्डरिंग एक्सपीरियंस

Zomato New Data Sharing Move: रेस्टोरेंट्स को मिलेगा डेटा, इंडस्ट्री का 10 साल पुराना विवाद सुलझने की उम्मीद

Zomato New Data Sharing Move: ऑनलाइन फूड डिलीवरी (Online Food Delivery) इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव आने वाला है। Zomato ने एक ऐसी सुविधा की टेस्टिंग शुरू कर दी है, जिससे ग्राहकों का नाम, पता और फोन नंबर सीधे रेस्टोरेंट्स तक पहुंच सकेगा। कंपनी का दावा है कि इससे रेस्टोरेंट्स अपने ग्राहकों को बेहतर समझ पाएंगे और उन्हें ज्यादा पर्सनलाइज्ड अनुभव मिल सकेगा। यह कदम उस बहस को भी नई दिशा दे सकता है, जो पिछले दस साल से रेस्टोरेंट इंडस्ट्री और फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स के बीच चली आ रही है। इस फीचर के तहत ग्राहक की जानकारी केवल तभी रेस्टोरेंट्स तक जाएगी, जब वह खुद इसकी अनुमति देगा। Zomato इस पहल पर नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के साथ भी बात कर रहा है। तो चलिए जानते हैं पूरी खबर क्या है…

फूड डिलीवरी में डेटा शेयरिंग की पुरानी बहस/Zomato New Data Sharing Move

ऑनलाइन फूड डिलीवरी (Online Food Delivery) के तेजी से बढ़ते दौर में रेस्टोरेंट्स और प्लेटफॉर्म्स के बीच ग्राहक डेटा को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है। रेस्टोरेंट्स का कहना था कि Zomato और Swiggy जैसे प्लेटफॉर्म्स ग्राहकों की जानकारी अपने पास रखते हैं, जिससे उन्हें यह पता नहीं चलता कि उनका वास्तविक ग्राहक कौन है और उसकी पसंद-नापसंद क्या है। यह बहस लगभग एक दशक से इंडस्ट्री में तनाव का कारण बनी हुई थी। रेस्टोरेंट्स अक्सर यह भी आरोप लगाते थे कि डेटा छिपाने के कारण वे अपने ग्राहकों तक सीधे ऑफर या प्रमोशन नहीं भेज पाते। ऐसे में Zomato की नई पहल इस खाई को पाटने और दोनों पक्षों के बीच पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है, खासकर तब जब यूजर्स का डेटा प्राइवेसी को लेकर भी लगातार जागरूकता बढ़ रही है।

Zomato का नया सिस्टम कैसे करेगा काम?

Zomato फिलहाल एक नए डेटा-शेयरिंग सिस्टम (Data Sharing System) की पायलट टेस्टिंग कर रहा है। इस फीचर के तहत ग्राहक का नाम, पता और फोन नंबर सीधे रेस्टोरेंट तक पहुंच जाएगा। लेकिन इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जानकारी तभी भेजी जाएगी, जब ग्राहक स्वयं “Allow” पर क्लिक करके इसकी मंजूरी देगा। यानी प्लेटफॉर्म ग्राहक को पूर्ण नियंत्रण दे रहा है कि वह कौन-सा डेटा शेयर करना चाहता है। Zomato का मानना है कि इससे रेस्टोरेंट्स अपने ग्राहकों के व्यवहार और उनकी ऑर्डरिंग पैटर्न को बेहतर समझ पाएंगे। कंपनी इस मॉडल पर विचार-विमर्श के लिए नेशनल रेस्टोरेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के साथ भी बातचीत कर रही है। यह पहल अभी सीमित क्षेत्रों में चल रही है और इसके नतीजों के आधार पर इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी होगी।

रेस्टोरेंट्स क्यों कर रहे हैं इस बदलाव का समर्थन?

कई रेस्टोरेंट्स (Restaurant) इस पहल को गेम-चेंजर बता रहे हैं। उनका कहना है कि कस्टमर डेटा मिलने से उन्हें अपने उपभोक्ताओं को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिलेगी जैसे कौन व्यक्ति कितनी बार ऑर्डर करता है, किस तरह का खाना पसंद करता है और किस समय सबसे अधिक ऑर्डर देता है। ये जानकारियां रेस्टोरेंट्स को न सिर्फ अपनी मार्केटिंग रणनीति मजबूत करने में मदद करेंगी, बल्कि वे ग्राहकों को उनके स्वाद के अनुरूप ऑफर भी भेज सकेंगे। इंडस्ट्री का यह भी मानना है कि ग्राहकों के साथ डायरेक्ट कनेक्ट किसी भी ब्रांड के लिए लंबे समय तक रिश्ते बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने डेटा प्राइवेसी के संभावित मुद्दों पर भी चिंता जताई है, लेकिन Zomato का ‘यूज़र-कंट्रोल्ड परमिशन’ मॉडल इन चिंताओं को कम करता दिखाई देता है।

कब तक लागू होगा यह नया सिस्टम?

Zomato का यह फीचर फिलहाल पायलट स्टेज में है और चुनिंदा लोकेशंस पर इसकी टेस्टिंग चल रही है। कंपनी इसकी परफॉर्मेंस और रेस्टोरेंट्स से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर अगले कदम तय करेगी। अगर सबकुछ योजना के अनुसार चलता है, तो आने वाले महीनों में यह सुविधा देशभर में शुरू की जा सकती है। डेटा प्राइवेसी को लेकर भी Zomato विशेष सावधानी बरत रहा है और ग्राहकों को अंतिम निर्णय का अधिकार देकर इस प्रक्रिया को पारदर्शी बना रहा है। इंडस्ट्री विशेषज्ञ इस कदम को फूड डिलीवरी इकोसिस्टम के लिए बड़ा बदलाव मान रहे हैं, जो न सिर्फ रेस्टोरेंट्स बल्कि ग्राहकों के ऑर्डरिंग अनुभव को भी और बेहतर बना सकता है। अब सभी की नजरें Zomato की आगामी घोषणा पर हैं कि यह फीचर कब बड़े स्तर पर रोल आउट किया जाएगा।

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