पिछले कुछ समय से भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश की हालत कुछ खास शी नहीं चल रही हैं. और ना ही बांग्लादेश के भारत से सम्बन्ध ? इसका जो मुख्य कारण है वो, बांग्लादेश की सत्ता परिवर्तन है. जबसे वहा शेख हसीना सत्ता से बेदखल हुई है . तब से ही चीजे सही नहीं चल रही है. अब कुछ रिपोर्टो की माने तो 3–4 अप्रैल को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में होने वाले BIMSTEC शिखर सम्मेलन में बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर मुहम्मद युनूस पीएम मोदी से मुलाकात चाहते हैं. हालांकि इस मुलाक़ात को ले कर भारत सरकार की ओर से अभी कोई जवाब नहीं आया है.
चीन से पहले भारत आना चाहते थे यूसुफ
हम आप को बता दे कि, मोहम्मद यूसुफ इन दिनों चीन के दौरे पर हैं. सूत्रों से मे जानकारी से अनुसार युनूस चीन दौरे पर जाने से पहले भारत आना चाहते थे, हालांकि बांग्लादेश के मामले की तरफ भारत ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.उधर, युनूस चीन के दौरे पर हैं. युनूस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि हमने वास्तव में अपनी रुचि दिखाई और पिछले साल दिसंबर में ही भारतीय पक्ष से युनूस की भारत की द्विपक्षीय यात्रा के लिए कहा. यह उनकी चीन यात्रा के अंतिम रूप दिए जाने से कुछ सप्ताह पहले किया गया था. दुर्भाग्य से हमें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली. युनूस चार महीनों में चीन पहुंचने वाले वाले दक्षिण एशिया के दूसरे नेता हैं. उनसे पहले नेपाउधर, युनूस चीन के दौरे पर हैं. लेकिन इस यात्रा से पहले वह भारत आना चाहते थे. युनूस के प्रेस सचिव शफीकुल आलम ने कहा कि हमने वास्तव में अपनी रुचि दिखाई और पिछले साल दिसंबर में ही भारतीय पक्ष से युनूस की भारत की द्विपक्षीय यात्रा के लिए कहा. यह उनकी चीन यात्रा के अंतिम रूप दिए जाने से कुछ सप्ताह पहले किया गया था. दुर्भाग्य से हमें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली. युनूस चार महीनों में चीन पहुंचने वाले वाले दक्षिण एशिया के दूसरे नेता हैं. उनसे पहले नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली दिसंबर 2024 में चार दिवसीय यात्रा पर चीन गए थे..
मोहम्मद यूनुस को मिली एक खास चिट्ठी !
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की राह देख रहे बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक खास चिट्ठी मिली है. ये चिट्ठी की और की नहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है. यह चिठ्ठी प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस पर लिखी है. बांग्लादेश अपना स्वतंत्रता दिवस 26 मार्च को मनाता है. यह दिन 1971 में उस ऐतिहासिक क्षण को बताता है, जब भारत की सैन्य सहायता के बदौलत बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बना था.
पीएम मोदी ने इस चिट्ठी में इतिहास का जिक्र किया
हम आप को बता दे कि,पीएम मोदी ने इस चिट्ठी में इतिहास का जिक्र किया और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की अटूट भावना को भारत-बांग्लादेश के मजबूत संबंधों की नींव बताए हुए पीएम मोदी ने सूक्ष्म रूप से बांग्लादेश को उसकी स्थापना में भारत की भूमिका की याद भी दिलाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का जिक्र उस समय किया है जब भारत के इस पड़ोसी देश में बंग बंधु शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है.
बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग ने जो संदेश साझा किया हैं. उस संदेश में पीएम मोदी ने बांग्लादेश के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए लिखा है, “यह दिन हमारे साझा इतिहास और बलिदान का प्रमाण है, जिसने हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की नींव रखी है. बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम की भावना हमारे संबंधों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है, जो कई क्षेत्रों में फली-फूली है और हमारे लोगों को ठोस लाभ पहुंचा रही है. हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपनी साझा आकांक्षाओं और एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.”
ज्यादा भाव नहीं दे रहा भारत !
हम आप को बताते चले की भारत बांग्लादेश को ज्यादा भाव देने के मूड में नहीं है. भारत नियमित समय-समय पर उसको मैसेज देता रहा है. हाल ही में विदेश मंत्रालय ने संसद की एक समिति को बताया कि बांग्लादेश सरकार ने अल्पसंख्यकों पर हो रहे उत्पीड़न को स्वीकार नहीं कर रही है. इसके अलावा शेख हसीना सरकार गिरने के बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के पैमाने और स्वरूप को भी कमतर बताने की कोशिश की है. साथ ही विदेश मंत्रालय ने पड़ोसी देश में इस्लामी शासन की स्थापना को लेकर विचारधारा को बढ़ावा देने वाले चरमपंथी समूहों को राजनीतिक शून्यता का फायदा उठाने का जिक्र भी किया गया है।