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बीजिंग : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर बीजिंग में दिखा योग का वैश्विक स्वरूप

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रिपोर्ट : अखिल पाराशर

21 जून को दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। इसी कड़ी में चीन की राजधानी बीजिंग भी योगमय नजर आई, जहां भारतीय दूतावास द्वारा एक भव्य और विशाल योग सत्र का आयोजन किया गया। इस आयोजन में हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया और खुले आसमान के नीचे सूर्य की पहली किरणों के साथ योगाभ्यास कर वातावरण को ऊर्जा और शांति से भर दिया।

इस विशेष कार्यक्रम में न केवल योग प्रेमियों ने हिस्सा लिया, बल्कि बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, भारतीय प्रवासियों और छात्रों की भी भागीदारी रही। बीजिंग के पुराने भारतीय दूतावास परिसर में आयोजित दो घंटे लंबे इस कार्यक्रम में 1,000 से अधिक योग उत्साही शामिल हुए। भारत के राजदूत प्रदीप कुमार रावत, उनकी पत्नी श्रुति रावत और उप राजदूत अभिषेक शुक्ला भी इस अवसर पर योग करते नजर आए। दूतावास के अन्य अधिकारी भी इस सांस्कृतिक आयोजन में पूरे मनोयोग से शरीक हुए।

कार्यक्रम का उद्देश्य योग जैसी प्राचीन भारतीय जीवन पद्धति को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना था। इसके साथ ही यह आयोजन भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक संवाद और आपसी समझ को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। योग के जरिए दोनों देशों के लोगों के बीच संवाद का एक सुंदर सेतु निर्मित हुआ, जिसमें स्वास्थ्य, संतुलन और मानसिक शांति की भावना प्रमुख रही।

कार्यक्रम में योग के शारीरिक पहलुओं के साथ-साथ मानसिक और आध्यात्मिक पक्षों को भी छुआ गया। बीजिंग स्थित वीयोग स्टूडियो से योग गुरू आशीष बहुगुणा ने सामान्य योग प्रोटोकॉल का नेतृत्व किया, जबकि भारतीय दूतावास में भारतीय संस्कृति के शिक्षक और योग गुरु लोकेश शर्मा ने प्रतिभागियों को ध्यान की गहराई से रूबरू कराया। यह आयोजन योगीयोग, वीयोग, और हेमंत योग जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से संभव हो पाया।

2015 में भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को आधिकारिक मान्यता मिलने के बाद से यह दिवस दुनियाभर में हर साल 21 जून को मनाया जाता है। बीजिंग में हुआ यह आयोजन न केवल योग के प्रति लोगों के उत्साह को दर्शाता है, बल्कि यह भी सिद्ध करता है कि योग आज एक सीमाओं से परे वैश्विक सांस्कृतिक धरोहर बन चुका है, जो शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सौहार्द और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूती प्रदान करता है।

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