Angwali High School Controversy: बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड अंतर्गत आंगवाली उच्च विद्यालय अंगवाली इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन अच्छे कारण से नहीं। स्कूल की प्रधानाध्यापक निभा आइंद पर ग्रामीणों ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि वे शिक्षकों को परेशान करती हैं, बच्चों के साथ भेदभाव और शोषण करती हैं, स्कूल में भारी भ्रष्टाचार चल रहा है और शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। बच्चे पढ़ने की बजाय सड़क पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।
गाँव वाले और पंचायत मुखिया ने मिलकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को एक लंबा-चौड़ा पत्र लिखा है। पत्र में साफ-साफ कहा गया है कि अगर जल्द से जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो स्कूल पूरी तरह बंद हो जाएगा और सैकड़ों बच्चों का भविष्य अंधेरे में चला जाएगा। ग्रामीणों ने प्रधानाध्यापक को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है।

क्या-क्या आरोप लग रहे हैं प्रधानाध्यापक पर?/Angwali High School Controversy
ग्रामीणों का कहना है कि निभा आइंद ने स्कूल को अपनी जागीर बना रखा है। मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:
- शिक्षकों को बेवजह परेशान करना, ट्रांसफर की धमकी देना, मानसिक प्रताड़ना देना।
- बच्चों से पैसे वसूलना, स्कॉलरशिप के पैसे हड़पना, मिड-डे मील में घोटाला।
- स्कूल का फर्नीचर, किताबें, खेल का सामान सब बेच देना या अपने घर ले जाना।
- लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार और जातिसूचक टिप्पणियाँ करना।
- शिक्षक और बच्चे डर के मारे स्कूल आना ही बंद कर चुके हैं।
- क्लास में पढ़ाई नाममात्र की होती है, ज्यादातर समय स्कूल बंद रहता है।
इतना सब होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, इसी से गाँव वालों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
सीएम ने दिया कार्रवाई का आदेश, डीसी सक्रिय
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिकायत को गंभीरता से लिया और बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा को तुरंत जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया। डीसी साहब ने भी फौरन एक्शन लिया और जिला शिक्षा अधीक्षक जगन्नाथ लोहारा को जिम्मेदारी सौंपी।
जिला शिक्षा अधीक्षक ने प्रधानाध्यापक निभा आइंद को नोटिस जारी कर सिर्फ तीन दिन के अंदर अपना पक्ष रखने को कहा है। यानी अब बहुत जल्द इस मामले में कुछ बड़ा फैसला आने की संभावना है।
बच्चे बोले – “मैडम हमें डराती हैं, पढ़ाई नहीं होने देती”
स्कूल के कई बच्चों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि मैडम (निभा आइंद) जब भी आती हैं, क्लास में डांट-फटकार लगाती हैं। जो बच्चा सवाल पूछता है उसे डांटती हैं, कई बार मारने की धमकी भी देती हैं। गरीब बच्चों से पैसे मांगती हैं। स्कॉलरशिप के पैसे भी नहीं देते। मिड-डे मील में सिर्फ नमक-चावल मिलता है, वो भी कई-कई दिन नहीं मिलता।
दसवीं क्लास की एक छात्रा ने रोते हुए कहा, “हम बोर्ड एग्जाम देने जा रहे हैं, लेकिन पूरा साल पढ़ाई नहीं हुई। अब हम कहाँ जाएँ? हमारा भविष्य बर्बाद हो रहा है।”
ग्रामीणों का उबाल, धरना-प्रदर्शन शुरू
गाँव के लोग और पंचायत मुखिया ने मिलकर स्कूल के सामने धरना शुरू कर दिया है। बच्चे भी प्लेकार्ड लिए सड़क पर उतर आए हैं। नारे लग रहे हैं – “भ्रष्ट प्रधानाध्यापक हटाओ, स्कूल बचाओ”, “हमारा हक दो, शिक्षा दो”, “निभा आइंद मुर्दाबाद”।
मुखिया ने कहा, “हमारे गाँव के बच्चे पढ़-लिखकर अफसर बनें, यही सपना था। लेकिन इस महिला ने सारा सपना चूर-चूर कर दिया। अब और बर्दाश्त नहीं होगा। जब तक बर्खास्तगी नहीं होगी, हम धरना नहीं हटाएँगे।”
अब आगे क्या?
जिला शिक्षा विभाग ने तीन दिन का समय दिया है। अगर प्रधानाध्यापक अपना पक्ष नहीं रख पातीं या आरोप साबित हो जाते हैं तो बर्खास्तगी लगभग तय मानी जा रही है। दूसरी तरफ ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर कार्रवाई में देरी हुई तो वे रांची तक मार्च करेंगे और मुख्यमंत्री आवास के सामने धरना देंगे।
आंगवाली का यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि अगर समय रहते भ्रष्टाचार और मनमानी पर लगाम नहीं लगाई गई तो सरकारी स्कूलों का भगवान ही मालिक है। अब नजर इस बात पर है कि प्रशासन कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।
फिलहाल सैकड़ों बच्चों की उम्मीदें सरकार और प्रशासन पर टिकी हैं। उम्मीद है जल्द ही इन बच्चों को न्याय मिलेगा और स्कूल फिर से पढ़ाई का मंदिर बनेगा, कष्ट का केंद्र नहीं।










