संभल : उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के संभल (Sambhal) जिले की पुलिस ने तो हद ही कर दी. एक लूट के मामले में उस शख्स को आरोपी बनाकर मुठभेड़ में गिरफ्तार करने की बात दिखा दी जो वारदात के दिन बदायूं जेल में बंद था. संभल कोर्ट में विवेचना के दौरान पुलिस की कहानी झूठी साबित होने पर जज ने कड़ा रुख अख्तियार किया।
कोर्ट ने तत्कालीन थानी प्रभारी (इंस्पेक्टर) समेत 12 पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं. इस पर संभल जिले के पुलिस अधीक्षक का कहना है कि पुलिस पर कोई FIR नहीं दर्ज की जाएगी. कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील की जाएगी।

मामला बहजोई थाना क्षेत्र का है, जहां 25 अप्रैल 2022 को दुर्वेश पुत्र वीरपाल के साथ एक लाख रुपये की लूट की वारदात हुई थी. इसमें पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके जांच शुरू की. विवेचना के दौरान पुलिस ने 7 जुलाई 2022 को एक मुठभेड़ में ओमवीर समेत अन्य लोगों को लुटेरा बताकर गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने लूट का माल, 19 मोटरसाइकिलों की बरामदगी भी दिखाई. लेकिन, कोर्ट में तथ्यों ने पूरी कहानी ही पलट दी।
अधिवक्ता सुकांत कुमार ने अदालत को बताया कि ओमवीर एक अन्य मामले में 11 अप्रैल 2022 से 12 मई 2022 तक बदायूं जेल में बंद था. यानी जिस तारीख को लूट और मुठभेड़ दिखाई गई, उस वक्त वह जेल की सलाखों के पीछे था. अब सवाल यह उठता है कि जो शख्त जेल में बंद हो, वह सड़क पर लूट कैसे कर सकता है?
कोर्ट ने इस गंभीर विरोधाभास को देखते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी पंकज लवानिया (वर्तमान में मेरठ CO), अपराध निरीक्षक राहुल चौहान, उपनिरीक्षक प्रबोध कुमार, नरेश कुमार, नीरज कुमार, जमील अहमद समेत 12 पुलिसकर्मियों और दुर्वेश के खिलाफ तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए।
हालांकि इस आदेश में सीओ गोपाल सिंह को फिलहाल राहत दी गई है, लेकिन वादी पक्ष ने उनके खिलाफ भी आगे कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है. पीड़ित ओमवीर का कहना है, उसने फर्जी मुठभेड़ की शिकायत एसपी और अन्य आला अधिकारियों से की थी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ओमवीर के मुताबिक, 11 अप्रैल 2022 से 12 मई 2022 तक वह बदायूं की जिला कारागार में बंद था. 26 अप्रैल 2022 को जमानत मंजूर हुई थी लेकिन, जेल से बाहर आने में उसे 12 मई तक का समय लग गया. जबकि 7 जुलाई 2022 को दूध कारोबारी के साथ हुई लूट की घटना की फर्जी मुठभेड़ दिखाते हुए धीरेंद्र पुत्र कुंवरपाल, अवनेश पुत्र ऋषिपाल एवं ओमवीर पुत्र भगवान दास को 19 मोटरसाइकिल बरामद दिखाते हुए चालान कर जेल भेज दिया।
ओमवीर ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में वाद दायर करते हुए बताया कि वह दूध कारोबारी के साथ हुई घटना वाले दिन बदायूं की जिला कारागार में बंद था. ऐसी स्थिति में वह लूट की घटना को कैसे कर सकता है. संभल पुलिस ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसे झूठा फंसाया है. संभल पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई का इस मामले पर कहना है कि, पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कराएगी और कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील करेगी।










