CCL Basantpur Protest : झारखंड के रामगढ़ जिले में एक बार फिर कोयला कंपनी सीसीएल (सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड) के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। वेस्ट बोकारो ओपन पिट क्षेत्र के घाटों-चरही मार्ग पर करमटिया मोड़ के पास स्थित बसंतपुर परियोजना के प्रभावित ग्रामीणों ने रोजगार और उचित मुआवजे की मांग को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया। इस आंदोलन में सैकड़ों की संख्या में महिलाएं, पुरुष और युवा शामिल हुए। झारखंड से राज्यसभा सांसद खीरू महतो (जेडीयू) ने खुद इन ग्रामीणों का नेतृत्व किया। ढोल-नगाड़ों के साथ सड़क पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने न सिर्फ जोरदार नारे लगाए, बल्कि करीब सात घंटे तक सड़क को पूरी तरह जाम रखा। इससे दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
30-35 साल पुरानी जमीन, आज भी अधूरा वादा

प्रदर्शन करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि सीसीएल ने बसंतपुर परियोजना के लिए उनकी जमीन 30 से 35 साल पहले ही ले ली थी। उस समय कंपनी ने वादा किया था कि जमीन के बदले उचित मुआवजा और परिवार के सदस्यों को नौकरी दी जाएगी। लेकिन आज तक न तो पूरा मुआवजा मिला और न ही रोजगार। इन ग्रामीणों के पांच गांव पूरी तरह प्रभावित हुए हैं। जमीन चली गई, खेती-बाड़ी चौपट हो गई, लेकिन दूसरी पीढ़ी भी खत्म होने को आई और सीसीएल की ओर से सिर्फ आश्वासन ही मिलते रहे। ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने कई बार लिखित आवेदन दिए, मीटिंग की मांग की, लेकिन कंपनी प्रबंधन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब सब्र का बांध टूट चुका है।
एक प्रभावित ग्रामीण ने कहा, हमारी जमीन पर आज सीसीएल की केबीपीपी (कोतरे-बसंतपुर-पचमो प्रोजेक्ट) भी चल रही है। कोयला निकल रहा है, कंपनी कमाई कर रही है, लेकिन हमें कुछ नहीं मिला। हमारी बच्चियां-बेटे बेरोजगार घूम रहे हैं। कंपनी सिर्फ कागजों पर वादे करती है, अमल कुछ नहीं।
सांसद खीरू महतो ने ली अगुवाई
इस प्रदर्शन में सबसे अहम भूमिका निभाई राज्यसभा सांसद खीरू महतो ने। वे खुद सड़क पर उतरे और ग्रामीणों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नारे लगाए। सांसद ने कहा कि यह सिर्फ कुछ लोगों का नहीं, बल्कि पूरे चार-पांच गांवों का मुद्दा है। जमीन अधिग्रहण के बदले नौकरी और मुआवजा मिलना चाहिए। यह मामला तीस साल से ज्यादा समय से लंबित है। कंपनी ने कई बार लिखित में आश्वासन दिए, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। इसलिए लोग गुस्से में हैं।
सांसद ने चेतावनी भी दी कि अगर कल होने वाली बैठक में कोई हल नहीं निकला तो वे और सख्त कदम उठाएंगे। संपूर्ण केदला वाशरी का कोयला ढुलाई पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। बसंतपुर परियोजना के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू होगा। उन्होंने कहा, “कंपनी को अब सिर्फ बातों से काम नहीं चलेगा। लोगों का हक दिलाना हमारी जिम्मेदारी है।”
प्रोजेक्ट ऑफिसर ने लिया मांग पत्र, कल बैठक का ऐलान
प्रदर्शन की तीव्रता देखकर सीसीएल बसंतपुर परियोजना के प्रोजेक्ट ऑफिसर खुद मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बात की और उनकी मांगों का लिखित सूत्री मांग-पत्र लिया। ऑफिसर ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि अगले दिन यानी कल सांसद खीरू महतो की मौजूदगी में सीसीएल प्रबंधन के साथ प्रभावित ग्रामीणों की बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
वादाखिलाफी से बढ़ा आक्रोश

ग्रामीणों का गुस्सा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि कंपनी की ओर से बार-बार वादाखिलाफी होती आई है। लिखित आवेदन, मीटिंग के वादे, सब कुछ हुआ लेकिन नतीजा जीरो। अब लोग कह रहे हैं कि और इंतजार नहीं होगा। अगर कल की बैठक से कोई ठोस फैसला नहीं आया तो आंदोलन और तेज होगा। इससे कोयला उत्पादन और ढुलाई पर असर पड़ सकता है, जो सीसीएल के लिए बड़ा नुकसान होगा।
झारखंड में ऐसे मुद्दे आम
झारखंड जैसे कोयला प्रभावित राज्य में विस्थापितों की समस्या नई नहीं है। कई जगहों पर जमीन देने के बाद भी लोगों को नौकरी और मुआवजा नहीं मिलता। इससे आंदोलन होते रहते हैं। इस बार सांसद का सीधे शामिल होना दिखाता है कि मामला कितना गंभीर है। ग्रामीणों की मांग जायज है – उनकी जमीन पर कंपनी कमाई कर रही है, तो उन्हें भी उसका फायदा मिलना चाहिए।










