Surya Grahan 2026 : दिन में छा सकता है अंधेरा… इस दिन लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण

Surya Grahan 2026 : 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगेगा। यह कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें आसमान में ‘रिंग ऑफ फायर’ जैसा नजारा दिखाई देगा। जानिए ग्रहण का समय, कहां दिखेगा और भारत पर इसका क्या प्रभाव रहेगा।

Surya Grahan 2026 : साल 2026 खगोलीय घटनाओं के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। इस साल आकाश में कई दुर्लभ घटनाएं देखने को मिल रही हैं, जिनमें सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण प्रमुख हैं। साल की शुरुआत में 17 फरवरी को पहला सूर्य ग्रहण लगा था, जबकि 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण देखने को मिला। अब वैज्ञानिकों और खगोल विज्ञान में दिलचस्पी रखने वाले लोगों की नजर साल के दूसरे सूर्य ग्रहण पर टिकी हुई है, जो अगस्त महीने में लगेगा।

सूर्य ग्रहण क्या होता है?

सूर्य ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है, जो तब होती है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य की रोशनी को आंशिक या पूरी तरह से ढक देता है। जब सूर्य का बड़ा हिस्सा चंद्रमा के पीछे छिप जाता है, तो पृथ्वी के कुछ हिस्सों में अचानक रोशनी कम हो जाती है और दिन के समय भी हल्का अंधेरा महसूस होने लगता है। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि ग्रहण के दौरान सूर्य के वातावरण और उसकी ऊर्जा से जुड़ी कई जानकारियों का अध्ययन किया जाता है।

कब लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण?

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 को लगेगा। यह ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक जारी रहेगा। लगभग सात घंटे से ज्यादा समय तक चलने वाला यह ग्रहण खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहण के दौरान कई जगहों पर सूर्य का बड़ा हिस्सा ढक जाएगा, जिससे आसमान में अनोखा नजारा देखने को मिल सकता है।

कंकणाकृति सूर्य ग्रहण क्या होता है?

यह ग्रहण कंकणाकृति (Annular Solar Eclipse) होगा। इस प्रकार के ग्रहण में चंद्रमा सूर्य के बीच में तो आ जाता है, लेकिन उसकी दूरी ज्यादा होने के कारण वह सूर्य को पूरी तरह ढक नहीं पाता।

इस दौरान सूर्य का बाहरी हिस्सा चमकता हुआ दिखाई देता है और आसमान में एक चमकती हुई अंगूठी जैसी आकृति बनती है। इसी वजह से इसे आम भाषा में ‘रिंग ऑफ फायर’ भी कहा जाता है। यह दृश्य खगोल प्रेमियों के लिए बेहद रोमांचक माना जाता है।

क्या भारत में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?

भारत के लोगों को इस बार यह खगोलीय नजारा देखने को नहीं मिलेगा। जब यह ग्रहण लगेगा, उस समय भारत में रात होगी और सूर्य क्षितिज के नीचे रहेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता वहां सूतक काल भी मान्य नहीं होता। इसलिए भारत में इस ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट बंद नहीं होंगे और पूजा-पाठ या दैनिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी रहेंगी।

किन देशों में दिखेगा यह सूर्य ग्रहण?

यह सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी गोलार्ध के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। जिन क्षेत्रों में इसका प्रभाव अधिक रहेगा, उनमें शामिल हैं:

  • आर्कटिक क्षेत्र
  • ग्रीनलैंड
  • आइसलैंड
  • अटलांटिक महासागर का बड़ा हिस्सा
  • उत्तरी स्पेन

इसके अलावा यूरोप के कई देशों में यह ग्रहण आंशिक रूप से दिखाई देगा, जिनमें फ्रांस, ब्रिटेन और इटली प्रमुख हैं।

वैज्ञानिकों के लिए क्यों है खास अवसर?

र्य ग्रहण केवल एक दृश्य खगोलीय घटना ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए शोध का महत्वपूर्ण अवसर भी होता है। ग्रहण के दौरान वैज्ञानिक सूर्य के बाहरी वातावरण, ऊर्जा प्रवाह और अंतरिक्ष में होने वाली गतिविधियों का अध्ययन करते हैं।

इसके साथ ही पृथ्वी के वातावरण, तापमान और प्रकाश में आने वाले बदलावों को भी रिकॉर्ड किया जाता है, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी नई जानकारियां सामने आती हैं।

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