19 Rashtriya Rifles Iftar Party: रमज़ान का पवित्र महीना पूरे देश में एकता, भाईचारे और करुणा का संदेश लेकर आता है। इसी महीने के दौरान जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में भारतीय सेना की 19 राष्ट्रीय राइफल्स ने एक खास और दिल को छू लेने वाला कार्यक्रम आयोजित किया। अनंतनाग के लारकीपोरा इलाके में सेना की ओर से एक गरिमामय इफ्तार पार्टी रखी गई, जिसमें स्थानीय लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस कार्यक्रम का मकसद सिर्फ रोज़ा खोलना नहीं था, बल्कि सेना और आम जनता के बीच का रिश्ता और मजबूत करना था।
रमज़ान के दिनों में ये इफ्तार क्यों खास है?/19 Rashtriya Rifles Iftar Party
रमज़ान मुसलमानों के लिए सबसे पवित्र महीना होता है। इस दौरान लोग सुबह से शाम तक रोज़ा रखते हैं और सूरज ढलने के बाद इफ्तार करते हैं। इफ्तार का मतलब होता है रोज़ा तोड़ना, और यह समय खुशी, दुआओं और मिलन का होता है। ऐसे में 19 राष्ट्रीय राइफल्स ने सोचा कि क्यों न इस मौके पर स्थानीय लोगों के साथ मिलकर इफ्तार किया जाए। इससे न सिर्फ धार्मिक भावनाओं का सम्मान होता है, बल्कि सेना और लोगों के बीच विश्वास भी बढ़ता है।

यह कार्यक्रम लारकीपोरा में सेना के कैंप या क्षेत्र में हुआ, जहां पहले से ही सेना की मौजूदगी सुरक्षा के लिए है। लेकिन इस बार सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक एकता का भी संदेश दिया गया। सेना के जवान और अधिकारी खुद शामिल हुए और स्थानीय लोगों के साथ बैठकर खजूर, पानी और अन्य चीजों से इफ्तार किया। माहौल इतना सौहार्दपूर्ण था कि हर कोई एक परिवार की तरह महसूस कर रहा था।
कौन-कौन शामिल हुए इस खास इफ्तार में?
इस इफ्तार पार्टी में कई महत्वपूर्ण लोग आए। ओबीसी चेयरमैन और डोरू-वीरिनाग नगर पालिका समिति के पूर्व अध्यक्ष मोहम्मद इक़बाल आहंगर, जम्मू-कश्मीर यूथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के दक्षिण कश्मीर ज़ोनल अध्यक्ष फ़िरोज़ अहमद वानी, और भाजपा के वरिष्ठ नेता तथा जिला अनंतनाग के उपाध्यक्ष पंकज मलिक जैसे लोग मौजूद थे।
इसके अलावा आसपास के गांवों से बहुत सारे स्थानीय गणमान्य व्यक्ति, बुजुर्ग, युवा और आम नागरिक भी बड़ी संख्या में पहुंचे। सबने मिलकर एक साथ बैठकर इफ्तार किया। यह देखकर अच्छा लगता है कि अलग-अलग विचारधारा और समुदाय के लोग एक मेज पर बैठकर भाईचारे का पैगाम दे रहे थे। कार्यक्रम में सैकड़ों लोग थे, और हर कोई खुश नजर आ रहा था।
कमांडिंग ऑफिसर ने क्या कहा?
कार्यक्रम में 19 राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल रोहित रतन ने सबको संबोधित किया। उन्होंने कहा कि रमज़ान का महीना सब्र, करुणा और एकता का बड़ा संदेश देता है। स्थानीय लोगों के साथ इस पवित्र मौके पर इफ्तार करना हमारे लिए बहुत गर्व और सम्मान की बात है।
कर्नल रोहित रतन ने आगे कहा कि भारतीय सेना सिर्फ सुरक्षा देने के लिए यहां नहीं है। हम क्षेत्र में शांति बनाए रखने के साथ-साथ ऐसे सामाजिक काम भी करते हैं, जो समाज में भाईचारा और सौहार्द बढ़ाएं। ऐसे कार्यक्रमों से सेना और जनता के बीच का विश्वास मजबूत होता है, और लोग एक-दूसरे को बेहतर समझ पाते हैं।
स्थानीय लोगों की क्या राय थी?
कार्यक्रम में शामिल बुजुर्गों और युवाओं ने बहुत सराहना की। एक बुजुर्ग ने कहा, “ऐसे कार्यक्रमों से सेना और जनता के बीच का फासला कम होता है। हम देखते हैं कि सेना सिर्फ बंदूक नहीं, बल्कि प्यार और सम्मान भी लेकर आती है।”
युवाओं ने भी कहा कि इस तरह की इफ्तार पार्टी से आपसी समझ बढ़ती है। पहले लोग सेना को सिर्फ सुरक्षा बल के रूप में देखते थे, लेकिन अब वे सेना को अपना दोस्त और मददगार मानते हैं। एक युवा ने बताया, “यहां बैठकर इफ्तार करना बहुत अच्छा लगा। सबने मिलकर दुआएं मांगीं, और माहौल में खुशी थी।”
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इस इफ्तार पार्टी का सबसे बड़ा मकसद था – सेना और स्थानीय आबादी के बीच संबंधों को और मजबूत बनाना। कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में जहां कभी-कभी गलतफहमियां हो जाती हैं, ऐसे कार्यक्रम बहुत जरूरी होते हैं।
सेना चाहती है कि लोग उन्हें दुश्मन न समझें, बल्कि अपना हिस्सा मानें। इस कार्यक्रम से शांति, भाईचारा और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा मिला। अंत में सबने मिलकर क्षेत्र में शांति, समृद्धि और आपसी एकता के लिए दुआएं कीं। दुआओं में सबकी तरफ से अच्छे दिनों की कामना की गई।










