संभल के हयातनगर क्षेत्र में एक अनोखी पहल ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहां रहने वाली दीपा बाष्णेय पिछले तीन वर्षों से एक निशुल्क बाल संस्कार केंद्र का संचालन कर रही हैं। इस केंद्र की खास बात यह है कि यहां बच्चों को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें जीवन जीने की सही दिशा भी दी जाती है।
मुफ्त शिक्षा के साथ संस्कारों पर दिया जोर

दीपा बाष्णेय बताती हैं कि उनके केंद्र में 2 से 12 वर्ष तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है। यहां शिक्षा पूरी तरह निशुल्क है, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे भी इसका लाभ उठा सकें। वे मानती हैं कि आज के समय में बच्चों के भीतर संस्कारों की कमी देखने को मिल रही है, जिसे सुधारना बेहद जरूरी है।
बच्चों को सिखाए जाते हैं जीवन के जरूरी गुण
इस केंद्र में बच्चों को सिर्फ पढ़ना-लिखना ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जरूरी काम भी सिखाए जाते हैं।
यहां बच्चों को सिखाया जाता है:
- सुबह जल्दी उठने की आदत
- बड़ों का सम्मान करना
- खुद के छोटे-छोटे काम करना
- ईमानदारी और सहयोग की भावना
- दया और संवेदनशीलता
दीपा का मानना है कि ये छोटे-छोटे गुण ही बच्चों को एक बेहतर इंसान बनाते हैं।
नशे जैसी बुरी आदतों से बचाने की कोशिश
समाज में बढ़ती नशाखोरी को देखते हुए दीपा बच्चों को शुरू से ही इसके प्रति जागरूक करती हैं। वे उन्हें सही और गलत का फर्क समझाती हैं, ताकि वे भविष्य में किसी गलत रास्ते पर न जाएं।
खेल-खेल में बढ़ाई जा रही स्मरण शक्ति
इस केंद्र की एक और खासियत यह है कि बच्चों को खेल के माध्यम से सिखाया जाता है। इससे उनकी स्मरण शक्ति तेज होती है और वे सीखने में रुचि लेते हैं। साथ ही बच्चों को शारीरिक रूप से फिट और सक्रिय बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है।
समाज के लिए बनी प्रेरणा
दीपा बाष्णेय की यह पहल न सिर्फ बच्चों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन चुकी है। बिना किसी शुल्क के शिक्षा और संस्कार देना एक सराहनीय प्रयास है, जो आने वाली पीढ़ी को बेहतर बनाने की दिशा में मजबूत कदम है।










