रायबरेली कलेक्ट्रेट में आशा वर्कर्स का फूटा गुस्सा “काम लो तो दाम दो!”— जोरदार प्रदर्शन

3-4 साल से लंबित भुगतान, मानदेय में कटौती,आशा वर्कर्स ने दी काम बंद करने की चेतावनी

Raebareli: रायबरेली के कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय माहौल गरमा गया जब उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन की दर्जनों महिला कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आईं। “काम लो तो दाम दो” और “पूरा भुगतान दो” जैसे नारों के साथ उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। करीब तीन दर्जन से ज्यादा आशा वर्कर्स ने एकजुट होकर जिला प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

ज्ञापन देकर दी साफ चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान आशा वर्कर्स ने जिला प्रशासन के माध्यम से संबंधित विभाग और राज्य सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक उनका पूरा बकाया भुगतान नहीं किया जाएगा, तब तक वे काम नहीं करेंगी। यह चेतावनी प्रशासन के लिए एक बड़ा संकेत मानी जा रही है।

सालों से लंबित है भुगतान

सरेनी ब्लॉक की अध्यक्ष गीता सिंह ने प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023, 2024, 2025 और 2026 तक का भुगतान अब तक लंबित है। उनका कहना है कि कई योजनाओं में काम करने के बावजूद उन्हें समय पर पैसा नहीं मिल रहा है।

मानदेय में कटौती का आरोप

गीता सिंह ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ₹6800 मानदेय देने की बात करती है, लेकिन वास्तव में आशा वर्कर्स को कभी ₹3000 तो कभी ₹4000 ही मिलते हैं। उन्होंने कहा कि कागजों में पूरा भुगतान दिखाया जाता है, लेकिन असल में कम पैसा दिया जाता है।

सीधे बैंक खाते में भुगतान की मांग

प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने मांग की कि सभी भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए जाएं, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। इसके साथ ही उन्होंने न्यूनतम ₹10,000 से ₹15,000 तक मानदेय तय करने की भी मांग रखी।

अधिकारियों पर मनमानी के आरोप

अमावा ब्लॉक की अध्यक्ष साहएरा ने भी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी मनमानी कर रहे हैं।

उनका कहना है कि तीन-तीन और चार-चार महीने तक भुगतान नहीं किया जाता, लेकिन काम लगातार लिया जाता है। जब आशा वर्कर्स पैसा मांगती हैं, तो उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है।

कई योजनाओं का भुगतान भी बकाया

प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने बताया कि टीवी (क्षय रोग), आयुष्मान योजना और आधार से जुड़े कई कामों का भुगतान वर्षों से लंबित है। उन्होंने कहा कि मार्च क्लोजिंग का समय आ गया है, लेकिन अभी तक एक भी किस्त नहीं मिली है।

व्यवस्था पर उठाए सवाल

आशा संगीनियों ने व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब उनका भुगतान पोर्टल ठीक से काम नहीं करता, तो सरकार के अन्य पोर्टल कैसे सही तरीके से चल रहे हैं?

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने साफ चेतावनी दी कि अगर जल्द ही उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वे काम पूरी तरह बंद कर देंगी। इसके साथ ही आंदोलन को और तेज और व्यापक बनाने की बात भी कही गई।

Other Latest News

Leave a Comment