जनगणना फॉर्म में OBC वर्ग का कॉलम नहीं, लोगों के मन में उठे सवाल

रायबरेली: जनगणना एवं सर्वेक्षण कार्य के लिए उपयोग किए जा रहे ईएलओ (ELO) ऐप के फॉर्म को लेकर लोगों के बीच सवाल उठने लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फॉर्म की तस्वीरों में देखा जा सकता है कि जातिगत श्रेणी के कॉलम में केवल “अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य” का विकल्प दिया गया है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए अलग से कोई कॉलम या श्रेणी अंकित नहीं दिखाई दे रही है।

फॉर्म के बिंदु संख्या 13 में स्पष्ट रूप से लिखा गया है – “यदि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति या अन्य”। ऐसे में ओबीसी वर्ग के लोगों का कहना है कि देश और प्रदेश की बड़ी आबादी ओबीसी वर्ग से संबंधित है, फिर भी सर्वे फॉर्म में उनकी अलग पहचान दर्ज करने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि जब सरकारी योजनाओं, आरक्षण और सामाजिक आंकड़ों में ओबीसी वर्ग की महत्वपूर्ण भूमिका है, तो सर्वेक्षण के दौरान उनकी अलग श्रेणी का उल्लेख होना चाहिए। इससे भविष्य में सामाजिक एवं आर्थिक आंकड़ों के विश्लेषण में भी आसानी होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि संभवतः इस फॉर्म में केवल एससी और एसटी वर्ग की पहचान के लिए अलग कॉलम रखा गया है तथा शेष सभी वर्गों को “अन्य” श्रेणी में शामिल किया गया है। हालांकि, इससे ओबीसी वर्ग की वास्तविक संख्या और स्थिति का पृथक आंकड़ा उपलब्ध नहीं हो पाएगा।

वहीं, इस विषय पर आमजन के बीच चर्चा तेज हो गई है कि यदि यह जनगणना अथवा किसी सरकारी सर्वेक्षण का हिस्सा है तो ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम न होना क्या एक तकनीकी कमी है या फिर नीति के तहत ऐसा किया गया है?

अब लोगों की नजर संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर है कि वे इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करें और बताएं कि आखिर फॉर्म में ओबीसी वर्ग को अलग श्रेणी के रूप में क्यों शामिल नहीं किया गया।

(नोट: वायरल तस्वीरों के आधार पर उठे जनसवालों को प्रकाशित किया जा रहा है। संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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