फंगल इंफेक्शन: एक नया खतरनाक फंगल इंफेक्शन तेजी से फैल रहा है जो मुख्य रूप से बिल्लियों से इंसानों में पहुंच रहा है। इसका नाम है स्पोरोथ्रिक्स ब्रासिलिएन्सिस (Sporothrix brasiliensis)। यह फंगस त्वचा पर संक्रमण (स्पोरोट्रिकोसिस) पैदा करता है।
पहले यह सिर्फ ब्राजील तक सीमित था, लेकिन अब पूरे दक्षिण अमेरिका में फैल रहा है। वैज्ञानिक इसे इमर्जिंग फंगल थ्रेट (उभरता हुआ फंगल खतरा) मान रहे हैं। फंगस बाहर धागे जैसा दिखता है, लेकिन शरीर के अंदर यीस्ट के रूप में बदल जाता है और तेजी से फैलता है।

बिल्लियों से इंसानों में कैसे फैलता है?
यह फंगस बिल्लियों के जरिए बहुत आसानी से फैलता है। इंफेक्टेड बिल्लियों के चेहरे, नाक, पंजों और शरीर पर घाव या अल्सर होते हैं। जब ये बिल्लियां इंसानों को खरोंचती या काटती हैं, तो फंगस सीधे त्वचा में घुस जाता है।
सड़क की बिल्लियां आपस में लड़ती हैं, जिससे संक्रमण एक बिल्ली से दूसरी में और फिर इंसानों तक पहुंच जाता है। उरुग्वे में हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए जहां इंसानों और पालतू जानवरों में यह फंगस बिल्लियों से फैला। विशेषज्ञों का कहना है कि बिल्लियों में फंगस की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए खतरा भी अधिक है।
बिल्लियों और इंसानों में क्या लक्षण दिखते हैं?
बिल्लियों में:
- चेहरे, नाक, कान और पंजों पर घाव जो जल्दी ठीक नहीं होते
- बाल झड़ना
- आंखों से लालिमा या पानी आना
- गंभीर मामलों में संक्रमण पूरे शरीर में फैल सकता है
इंसानों में:
- संक्रमण शुरू में छोटे लाल दाने या गांठ से होता है
- दाने फटकर घाव में बदल जाते हैं
- कई बार घाव एक लाइन में फैलते हैं (जिसे rose gardener’s disease भी कहते हैं)
- शुरुआत में इसे बैक्टीरियल इंफेक्शन समझ लिया जाता है, जिससे इलाज में देरी हो जाती है
बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों (जैसे डायबिटीज, कैंसर या HIV वाले) में यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है। गंभीर मामलों में संक्रमण फेफड़ों या पूरे शरीर में फैल सकता है।
दक्षिण अमेरिका रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला
दक्षिण अमेरिका के उरुग्वे में हाल ही में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। माल्डोनाडो और रोचा इलाकों में बिल्लियों, अन्य पालतू जानवरों और इंसानों में यह फंगस पाया गया। रिसर्च में पुष्टि हुई कि संक्रमण बिल्लियों से ही फैला है।
यह सिर्फ एक-दो मामले नहीं हैं, बल्कि कई इलाकों में फैलाव दिख रहा है। वैज्ञानिकों को चिंता है कि अगर समय रहते कंट्रोल नहीं किया गया तो यह बड़ा आउटब्रेक बन सकता है। ब्राजील में पिछले 10 सालों में 11,000 से ज्यादा मानव मामले रिपोर्ट हो चुके हैं, जो दिखाता है कि खतरा कितना बड़ा है।
इलाज संभव है, लेकिन समय पर जरूरी
यह बीमारी ठीक हो सकती है, लेकिन सही और लंबे इलाज की जरूरत पड़ती है। मुख्य दवा इट्राकोनाजोल (Itraconazole) है, जिसे कई महीनों तक लेना पड़ सकता है। कभी-कभी पोटैशियम आयोडाइड भी दी जाती है।
डॉक्टर लैब टेस्ट करके पुष्टि करते हैं। बिल्लियों का इलाज भी लंबा चलता है और मालिकों को पूरा कोर्स पूरा करना पड़ता है। गंभीर मामलों में मौत भी हो सकती है, खासकर अगर इलाज न हो।
कैसे बचें? सावधानियां जरूरी
- सड़क की बिल्लियों से दूरी रखें, खासकर अगर उनके शरीर पर घाव दिखें
- अगर आपकी पालतू बिल्ली में घाव या बाल झड़ने के लक्षण दिखें तो तुरंत vet डॉक्टर से दिखाएं
- खरोंच या काटने पर तुरंत घाव को साबुन और पानी से अच्छे से धोएं
- घाव पर एंटीसेप्टिक लगाएं और डॉक्टर से सलाह लें
- बच्चों को सड़क की बिल्लियों से खेलने से रोकें
- अगर आप दक्षिण अमेरिका की यात्रा पर हैं तो सतर्क रहें
क्या भारत या दुनिया के बाकी हिस्सों में खतरा?
अभी यह समस्या मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका (ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे, चिली आदि) तक है, लेकिन वैज्ञानिक चिंतित हैं क्योंकि फंगस रूप बदलने में माहिर है और तेजी से फैल रहा है। कुछ मामले यूके जैसे देशों में भी रिपोर्ट हुए हैं जहां ब्राजील से आए लोग संक्रमित थे।
भारत में अभी ऐसा कोई बड़ा मामला नहीं है, लेकिन पालतू जानवरों की बढ़ती संख्या और यात्राओं को देखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि किसी भी असामान्य त्वचा संक्रमण को नजरअंदाज न करें।
निष्कर्ष
यह फंगल इंफेक्शन जानलेवा हो सकता है अगर समय पर इलाज न हो, लेकिन जागरूकता और सावधानी से इसे रोका जा सकता है। अगर आपकी बिल्ली में कोई घाव या असामान्य लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें। इंसानों में कोई भी नॉन-हीलिंग घाव या दाने हो तो डॉक्टर से जांच कराएं।










