एम्स रायबरेली (AIIMS Raebareli) में मरीजों की सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया। संस्थान के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की ओर से “खून के तर्कसंगत इस्तेमाल” विषय पर सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य डॉक्टरों को वैज्ञानिक और जिम्मेदार तरीके से ब्लड ट्रांसफ्यूजन के उपयोग के लिए जागरूक करना रहा।
यह कार्यक्रम कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन के संरक्षण में आयोजित किया गया था, जिन्होंने जान बचाने और खून के अनावश्यक इस्तेमाल को रोकने में सबूत-आधारित ट्रांसफ्यूजन तरीकों की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया।

इस CME कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मौके पर डीन एकेडमिक्स, एएमएस, प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारियों सहित संस्थान के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग की टीम की अहम भूमिका रही, जिसमें विभागाध्यक्ष और आयोजन सचिवों ने समन्वय संभाला।
विशेषज्ञों ने साझा किए आधुनिक ट्रांसफ्यूजन तरीके
कार्यक्रम में बाहरी और आंतरिक विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण सत्र लिए। Sanjay Gandhi Postgraduate Institute of Medical Sciences, लखनऊ से आए प्रोफेसर डॉ. धीरज खेतान ने ट्रांसफ्यूजन के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं ट्रॉमा और इमरजेंसी विशेषज्ञों ने TEG-आधारित (Thromboelastography) तकनीक के उपयोग और उसके लाभों को विस्तार से समझाया।
प्रमुख बिंदु:
- जरूरत के अनुसार ही ब्लड का उपयोग
- मरीज की स्थिति के अनुसार निर्णय
- नई तकनीकों से बेहतर परिणाम
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में चिकित्सकों और रेजिडेंट डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। उनकी सक्रिय भागीदारी से यह साफ हुआ कि चिकित्सा समुदाय सुरक्षित और जिम्मेदार ब्लड ट्रांसफ्यूजन के प्रति गंभीर है। कार्यक्रम ने न केवल ज्ञान साझा करने का मंच दिया बल्कि बेहतर इलाज के लिए नई सोच को भी प्रोत्साहित किया।










