रायबरेली के इतिहासविद डॉ. जितेंद्र प्रताप सिंह थाईलैंड में देंगे ‘रामायण’ पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान

रायबरेली के रहने वाले इतिहासविद डॉक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह थाईलैंड में होने जा रही द्वितीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में प्रतिभाग करेंगे। इस दौरान वे कॉन्फ्रेंस में ‘ रामायण’ पर व्याख्यान करेंगे।

कार्यक्रम की जानकारी देते हुए डॉक्टर जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन 23-24 अप्रैल को रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर लैंग्वेज एंड कल्चर्स ऑफ़ एशिया (RILCA ) महिडोल विश्वविद्यालय थाईलैंड में हो रहा है। जिसमे दुनिया भर के शोधकर्ता उपस्थित होंगे। उन्होंने बताया कि वह ‘ द रामायण ट्रेडीशंस इन थाई कल्चर विद रिफरेंस टू इंडियन डायसपोरा ‘ विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि इसी दौरान 25-26 अप्रैल को शिल्पकोर्न विश्वविद्यालय बैंकाक में इंडो-थाई कल्चरल रिलेशन्स विषय पर भी वे अतिथि व्यख्यान देंगे। साथ ही थाईलैंड और कंबोडिया में भारतीय संस्कृति विशेष कर रामायण से संबंधित संस्कृत पुरास्थलों का अवलोकन भी करेंगे।

उन्हें यह निमंत्रण सेंट्रल फ़ॉर भारत स्टडीज, रिसर्च इंस्टीट्यूट आफ लैंग्वेज एंद कल्चर्स ऑफ़ एशिया महिडोल यूनिवर्सिटी थाईलैंड के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर सोफाना श्रीचोंपा की तरफ से मिला है।

रायबरेली के डीह के रहने वाले डॉ जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उन्होंने इतिहास विषय में एमफिल व पीएचडी की है। उनके द्वारा 22 पुस्तकें और 80 रिसर्च पेपर प्रकाशित किये गए हैं। उनके द्वारा इतिहास संस्कृति, धर्म, दर्शन, दलित एवं स्त्री विमर्श के साथ दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में भारतीय संस्कृति के प्रभाव का अनुसंधान परक प्रतिवादी लेखन का कार्य भी किया गया है।

उन्होंने बताया कि 55 राष्ट्रीय एवं 18 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में उन्होंने विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों में सहभागिता की है।उनके द्वारा आठ राष्ट्रीय और पांच अंतर्राष्ट्रीय सम्मान भी प्राप्त किए गए हैं। अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना नई दिल्ली, ग्लोबल एसोसिएशन फ़ॉर ह्यूमैनिटीज एन्ड सोशल साइंस, इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस, सोशल साइंस एंड ह्यूमैनिटीज रिसर्च एसोसिएशन और इंटरनेशनल सोशल हिस्ट्री एसोसिएशन के वह आजीवन सदस्य हैं। उन्होंने बताया कि अनुसंधान परक सर्वेक्षण और व्याख्यान के लिए हुए 11 दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों का अभी तक भ्रमण कर चुके हैं।

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