कायमगंज बस अड्डा बना ‘सफेद हाथी’, लाखों खर्च के बाद भी बदहाली जारी

बसें नहीं आतीं, गंदगी और अव्यवस्था से जूझ रहे यात्री, प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

फर्रुखाबाद जिले के कायमगंज में लाखों रुपये की लागत से बनाया गया रोडवेज बस अड्डा आज बदहाली की कहानी बयां कर रहा है। जिस बस स्टैंड को लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया था, वही अब बेकार साबित हो रहा है। स्थानीय लोग इसे ‘सफेद हाथी’ कहने लगे हैं, क्योंकि इस पर पैसा तो खूब खर्च हुआ, लेकिन इसका फायदा किसी को नहीं मिल रहा।

उद्घाटन के समय किए गए थे बड़े वादे

जब इस बस अड्डे का उद्घाटन हुआ था, तब इसे क्षेत्र के विकास की बड़ी उपलब्धि बताया गया था। लोगों को उम्मीद थी कि अब उन्हें बेहतर बस सुविधा मिलेगी और यात्रा करना आसान हो जाएगा। उस समय प्रदेश के वरिष्ठ नेता स्वतंत्र देव सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। लेकिन समय बीतने के साथ ये वादे पूरे नहीं हो सके और हालात लगातार बिगड़ते गए।

रोडवेज बसों का नहीं होता संचालन

इस बस अड्डे की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यहां रोडवेज की बसें आती ही नहीं हैं। यात्रियों को मजबूरी में सड़क किनारे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। इससे उन्हें काफी परेशानी होती है, खासकर बुजुर्गों और महिलाओं को। दूसरी ओर, बस स्टैंड के अंदर प्राइवेट वाहन खड़े रहते हैं। इससे यह जगह एक तरह से अवैध पार्किंग स्थल बन गई है। प्रशासन की अनदेखी के कारण यह समस्या लगातार बढ़ती जा रही है।

सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह नदारद

बस अड्डे की सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद खराब है। परिसर की बाउंड्री वॉल कई जगहों से टूटी हुई है, जिससे कोई भी व्यक्ति आसानी से अंदर आ सकता है। इससे यहां असामाजिक गतिविधियों का खतरा बना रहता है।स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मरम्मत कराई जाती, तो आज यह स्थिति नहीं होती। लेकिन लंबे समय से इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

गंदगी का अंबार, साफ-सफाई का अभाव

बस अड्डे के अंदर हर तरफ गंदगी फैली हुई है। कूड़े के ढेर लगे हैं और सफाई की कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। यात्रियों को यहां बैठने तक की सुविधा नहीं मिलती। बरसात के समय हालात और खराब हो जाते हैं। पानी भर जाता है और कीचड़ फैल जाती है, जिससे लोगों का चलना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

बंद पड़ा पूछताछ केंद्र

यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए गए पूछताछ केंद्र का भी कोई उपयोग नहीं हो रहा है। यह केंद्र ज्यादातर समय बंद रहता है और वहां कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिलता। इस वजह से यात्रियों को बसों की जानकारी नहीं मिल पाती, जिससे उन्हें काफी दिक्कत होती है। खासकर बाहर से आने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं।

हर जगह लटके ताले, विभाग की लापरवाही

बस अड्डे के कई कमरों और सुविधाओं पर ताले लटके रहते हैं। यह साफ दिखाता है कि संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहा है। न तो यहां नियमित निगरानी होती है और न ही किसी तरह की देखरेख की जा रही है। यही कारण है कि यह बस अड्डा धीरे-धीरे खंडहर में बदलता जा रहा है।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

इस बदहाल स्थिति को देखकर स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। उनका कहना है कि जब बस अड्डा बनाया गया था, तब बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन आज वे सब झूठे साबित हो रहे हैं। लोगों का मानना है कि अगर प्रशासन ईमानदारी से काम करे, तो इस बस अड्डे को फिर से चालू किया जा सकता है और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकती है।

प्रशासन से सुधार की मांग

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि इस बस अड्डे की हालत सुधारी जाए। यहां नियमित रूप से रोडवेज बसों का संचालन शुरू किया जाए, साफ-सफाई की व्यवस्था बेहतर की जाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं।

निष्कर्ष

कायमगंज बस अड्डा आज लापरवाही और अधूरी योजनाओं का उदाहरण बन चुका है। लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद इसका सही उपयोग नहीं हो पा रहा है।

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