तमिलनाडु में नई सरकार को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। टीवीके (TVK) प्रमुख विजय की पार्टी चुनाव में बड़ी ताकत बनकर उभरी है, लेकिन अभी सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है। इसी वजह से शपथग्रहण कार्यक्रम पर भी सस्पेंस बना हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, विजय की पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है, लेकिन अकेले दम पर सरकार बनाने के लिए सीटों की संख्या पूरी नहीं हो पाई। ऐसे में दूसरी पार्टियों के समर्थन की जरूरत पड़ रही है। कांग्रेस ने समर्थन देने के संकेत दिए हैं, जबकि कुछ अन्य दल अभी दूरी बनाए हुए हैं। इसी वजह से सरकार गठन में देरी हो रही है।

शपथग्रहण कार्यक्रम पर बना सस्पेंस
राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि विजय जल्द मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। शुरुआत में माना जा रहा था कि शपथग्रहण समारोह तय तारीख पर हो जाएगा, लेकिन अब मामला अटकता नजर आ रहा है। राज्यपाल की तरफ से समर्थन देने वाले विधायकों की सूची और समर्थन पत्र मांगे गए हैं।
बताया जा रहा है कि सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या पूरी होने के बाद ही राज्यपाल अगला फैसला लेंगे। इसी कारण विजय का शपथग्रहण कार्यक्रम फिलहाल टल गया है। समर्थकों के बीच उत्साह तो है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है।
सुरक्षा प्रोटोकॉल वापस लेने से बढ़ी चर्चा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच विजय की सुरक्षा को लेकर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। कुछ समय पहले उन्हें मुख्यमंत्री स्तर की सुरक्षा और विशेष प्रोटोकॉल दिया गया था। लेकिन अब यह विशेष सुरक्षा वापस ले ली गई है।
हालांकि सामान्य सुरक्षा व्यवस्था अभी भी जारी है, लेकिन इस फैसले के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दल इसे सरकार गठन में देरी से जोड़कर देख रहे हैं। वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव नियमों के तहत किया गया है।
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से डीएमके और एआईएडीएमके के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन इस बार चुनाव में विजय की पार्टी ने नया समीकरण बना दिया। खासकर युवाओं और पहली बार वोट डालने वाले लोगों ने TVK को अच्छा समर्थन दिया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता ने पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने कम समय में मजबूत पकड़ बनाई है। हालांकि सरकार बनाने के लिए सिर्फ लोकप्रियता नहीं बल्कि संख्या बल भी जरूरी होता है, और फिलहाल वही सबसे बड़ा पेच बना हुआ है।
सहयोगी दलों की भूमिका अहम
सरकार गठन में अब छोटे और सहयोगी दलों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो गई है। कांग्रेस के समर्थन के बाद भी विजय को कुछ और विधायकों की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में अन्य क्षेत्रीय दलों पर सबकी नजर बनी हुई है।
वहीं विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं कि अगर बहुमत साफ नहीं है तो सरकार गठन में जल्दबाजी क्यों की जा रही थी। राजनीतिक माहौल में बयानबाजी भी तेज हो चुकी है। आने वाले दिनों में कई बड़े राजनीतिक फैसले देखने को मिल सकते हैं।
जनता की नजरें अगले फैसले पर
तमिलनाडु की जनता अब राज्यपाल और राजनीतिक दलों के अगले कदम का इंतजार कर रही है। अगर विजय जरूरी समर्थन जुटा लेते हैं तो उन्हें सरकार बनाने का मौका मिल सकता है। लेकिन अगर संख्या पूरी नहीं हुई तो राजनीतिक संकट और गहरा सकता है।
फिलहाल राज्य की राजनीति में सस्पेंस बना हुआ है। विजय के समर्थक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि उनके नेता जल्द मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। वहीं विपक्ष पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अगले कुछ दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।










