झारखंड के रामगढ़ जिले से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ गढ़बांध के पास दामोदर नदी में नहाने गए दो स्कूली बच्चों की डूबने से मौत हो गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। करीब 8 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद दोनों बच्चों के शव नदी से बाहर निकाले गए।
क्रिकेट खेलने निकले थे तीन दोस्त
मिली जानकारी के अनुसार, रामगढ़ शहर के बिजुलिया और किसान नगर इलाके के रहने वाले तीन स्कूली दोस्त—13 वर्षीय प्रिंस कुमार सोनकर, 12 वर्षीय वैभव कुमार और 16 वर्षीय आयुष कुमार तिवारी—घर से यह कहकर निकले थे कि वे क्रिकेट खेलने जा रहे हैं।

घरवालों को लगा कि बच्चे पास ही खेल रहे होंगे, लेकिन किसे पता था कि कुछ ही घंटों में यह दिन उनकी जिंदगी का सबसे काला दिन बन जाएगा।
नदी में नहाने उतरे, गहराई का अंदाजा नहीं था
बताया जा रहा है कि क्रिकेट खेलने के बाद तीनों दोस्त गर्मी से राहत पाने के लिए गढ़बांध के पास दामोदर नदी में नहाने उतर गए। शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन जैसे ही वे गहरे पानी की तरफ बढ़े, उन्हें नदी की गहराई और तेज बहाव का अंदाजा नहीं रहा।
देखते ही देखते तीनों बच्चे पानी में डूबने लगे और मदद के लिए चीखने लगे।
मौके पर मौजूद लोगों ने बचाने की कोशिश की
बच्चों की चीख-पुकार सुनकर पास में काम कर रहे कुछ मजदूर तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगा दी और बचाव कार्य शुरू किया।
कड़ी मशक्कत के बाद 16 वर्षीय आयुष कुमार तिवारी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन प्रिंस और वैभव पानी के तेज बहाव में बह गए और गहराई में चले गए।
8 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों की भारी भीड़ मौके पर जुट गई। कुछ ही देर में रामगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस टीम भी पहुंच गई। तुरंत ही स्थानीय गोताखोरों को रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया।
नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी मुश्किलें आईं। गोताखोर लगातार बच्चों की तलाश करते रहे, लेकिन कई घंटों तक कोई सफलता नहीं मिली।
करीब 8 घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार गोताखोरों ने दोनों बच्चों—प्रिंस और वैभव—के शव नदी से बाहर निकाले।
शव देखते ही फूट पड़े परिजन
जैसे ही दोनों मासूमों के शव किनारे लाए गए, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मां-बाप बार-बार अपने बच्चों को पुकारते रहे, लेकिन अब सब कुछ खत्म हो चुका था।
घाट पर मौजूद लोग भी इस दर्दनाक दृश्य को देखकर भावुक हो गए। पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
इलाके में पसरा मातम, हर कोई सदमे में
इस हादसे के बाद बिजुलिया और किसान नगर इलाके में मातम का माहौल है। हर कोई यही कह रहा है कि यह हादसा बेहद दर्दनाक और दिल को झकझोर देने वाला है। बच्चों की अचानक मौत से पूरा मोहल्ला सदमे में है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दामोदर नदी का यह हिस्सा काफी खतरनाक है, लेकिन गर्मी के मौसम में बच्चे अक्सर वहां नहाने चले जाते हैं।
प्रशासन की अपील
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि बच्चे बिना निगरानी के नदी, तालाब या गहरे पानी के पास न जाएं। खासकर गर्मियों के मौसम में ऐसी घटनाएं ज्यादा देखने को मिलती हैं, जो पूरे परिवार को कभी न भरने वाला दर्द दे जाती हैं।
निष्कर्ष
रामगढ़ की यह घटना एक बार फिर यह सिखाती है कि थोड़ी सी लापरवाही कितनी बड़ी त्रासदी में बदल सकती है। क्रिकेट खेलने निकले मासूम बच्चे जब घर नहीं लौटे तो उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। यह हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हर माता-पिता के लिए एक चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।










