ईरान में मिसाइल बेस के अंदर चल रहा था लड़कियों का स्कूल? अमेरिकी सेना के दावे से मचा हड़कंप

स्कूल पर हुए हमले की जांच में सामने आया बड़ा दावा

ईरान में हुए एक दर्दनाक हमले को लेकर अब बड़ा खुलासा सामने आया है। अमेरिकी सेना की जांच में दावा किया गया है कि जिस लड़कियों के स्कूल पर हमला हुआ था, वह एक एक्टिव मिसाइल बेस के पास या उसी सैन्य इलाके के अंदर मौजूद था। इस दावे के बाद पूरी दुनिया में बहस छिड़ गई है कि आखिर बच्चों के स्कूल सैन्य ठिकानों के पास क्यों चलाए जा रहे थे।

यह मामला फरवरी 2026 का बताया जा रहा है, जब ईरान के मिनाब इलाके में एक लड़कियों के स्कूल पर मिसाइल हमला हुआ था। इस हमले में बड़ी संख्या में बच्चों और शिक्षकों की मौत हो गई थी। शुरुआत में इस हमले को लेकर काफी भ्रम बना रहा, लेकिन अब अमेरिकी सैन्य अधिकारियों की जांच में कई अहम बातें सामने आ रही हैं।

अमेरिकी सेना क्या कह रही है?

अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि जिस जगह हमला हुआ, वहां ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) का एक्टिव क्रूज मिसाइल बेस मौजूद था। उनके मुताबिक जांच इसलिए जटिल हो गई क्योंकि स्कूल और सैन्य ठिकाना बेहद करीब थे।

अमेरिका का कहना है कि वह पूरे मामले की जांच कर रहा है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हमला कैसे हुआ और क्या इसमें अमेरिकी मिसाइल शामिल थी। हालांकि अभी तक अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर पूरी जिम्मेदारी नहीं ली है।

हमले में गई थी सैकड़ों बच्चों की जान

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में 160 से ज्यादा बच्चे और शिक्षक मारे गए थे। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 175 तक बताई गई है। स्कूल पूरी तरह तबाह हो गया था और उसकी तस्वीरों ने दुनिया को झकझोर कर रख दिया था।

घटना के बाद ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने शुरुआत में कहा था कि मामले की जांच की जा रही है। बाद में कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल इस हमले में इस्तेमाल हुई हो सकती है।

वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरों से बढ़ा शक

हमले के बाद कुछ वीडियो और सैटेलाइट तस्वीरें सामने आईं, जिनमें स्कूल के पास धुआं उठता दिखाई दिया। जांच करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि वीडियो में दिख रही मिसाइल अमेरिकी टॉमहॉक जैसी लग रही थी।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि स्कूल पहले कभी सैन्य परिसर का हिस्सा रहा होगा, लेकिन बाद में वहां बच्चों की पढ़ाई शुरू हो गई थी। हालांकि ईरान ने अमेरिका के इस दावे को “झूठा और भ्रामक” बताया है।

ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप

ईरान का कहना है कि अमेरिका अपने हमले को सही ठहराने के लिए अब नए-नए दावे कर रहा है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि बच्चों के स्कूल को मिसाइल बेस बताना बेहद शर्मनाक है और इससे मासूम लोगों की मौत को छिपाया नहीं जा सकता।

ईरान ने इस हमले को युद्ध अपराध तक बताया है। वहीं कई मानवाधिकार संगठनों ने भी नागरिक इलाकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई है।

अमेरिका के अंदर भी उठ रहे सवाल

इस घटना को लेकर अमेरिका के भीतर भी सवाल उठ रहे हैं। कुछ सांसदों और विशेषज्ञों ने पूछा है कि अगर इलाके में स्कूल मौजूद था तो हमले से पहले पूरी जांच क्यों नहीं की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार शुरुआती जांच में “पुरानी और गलत इंटेलिजेंस जानकारी” को हमले की वजह बताया गया है।

बताया जा रहा है कि अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने पुराने नक्शों और डेटा के आधार पर टारगेट तय किया था, जिसकी वजह से बड़ी गलती हो गई।

दुनिया भर में बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद दुनिया भर में चिंता बढ़ गई है कि युद्ध और सैन्य संघर्षों में आम नागरिक सबसे ज्यादा नुकसान झेलते हैं। खासकर बच्चों और स्कूलों पर होने वाले हमलों को लेकर अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चिंता जताई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सैन्य ठिकानों के पास स्कूल या रिहायशी इलाके होंगे तो ऐसे हादसों का खतरा और बढ़ जाएगा। वहीं दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई करने वाले देशों की जिम्मेदारी भी बनती है कि वे टारगेट की पूरी जांच करें।

अभी जांच जारी

फिलहाल अमेरिकी सेना की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। आने वाले समय में इस मामले पर और बड़े खुलासे हो सकते हैं। पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या अमेरिका आधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार करेगा या नहीं।

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