ट्विशा शर्मा केस: सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया और पक्षकारों को दी नसीहत, CJI सूर्यकांत बोले- “हम दुखी हैं”

भोपाल के चर्चित मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई

भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान देश की सबसे बड़ी अदालत ने मामले को लेकर कई अहम बातें कहीं। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि अदालत कुछ ऐसी बातों से दुखी है, जिनमें यह आरोप लगाया जा रहा है कि न्यायपालिका आरोपियों को बचाने की कोशिश कर रही है या निष्पक्ष जांच नहीं होने दे रही है। अदालत ने साफ कहा कि ऐसी बातें बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं और बिना पूरी जानकारी के इस तरह के दावे नहीं किए जाने चाहिए।

मीडिया को जिम्मेदारी से काम करने की सलाह

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मीडिया को भी सख्त लेकिन संतुलित संदेश दिया। अदालत ने कहा कि मीडिया को किसी एक पक्ष की बात के आधार पर खबरें चलाने से बचना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि संवेदनशील मामलों में रिपोर्टिंग करते समय सावधानी जरूरी है, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है।

CJI सूर्यकांत ने कहा कि मीडिया का काम बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन ऐसी रिपोर्टिंग नहीं होनी चाहिए जिससे यह लगे कि अदालत या जांच एजेंसियां किसी एक पक्ष का साथ दे रही हैं। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी होने से पहले निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं है।

क्या है ट्विशा शर्मा मामला?

यह मामला भोपाल की 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़ा है। 12 मई को उनकी मौत हुई थी, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पर इस केस को लेकर कई सवाल उठाए गए। मृतका के पति पेशे से वकील हैं, जबकि उनकी सास रिटायर्ड जिला जज बताई जा रही हैं। इसी वजह से मामले को हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है।

कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही है। इन दावों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया। अदालत ने कहा कि ऐसी छवि बनाई गई मानो जांच एजेंसियां सही तरीके से काम नहीं कर रहीं, जबकि अभी जांच जारी है।

कोर्ट ने कहा- जांच एजेंसियों पर भरोसा रखें

सुनवाई के दौरान सुप्रीम Court की बेंच में CJI सूर्यकांत के साथ जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचौली भी शामिल थे। अदालत ने कहा कि उसे भरोसा है कि जांच एजेंसियां मामले की निष्पक्ष जांच करेंगी और सच्चाई सामने लाएंगी।

कोर्ट ने कहा कि चाहे राज्य एजेंसी जांच करे या सीबीआई, जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि उसे इस बात पर कोई शक नहीं है कि पीड़ित परिवार और आरोपी पक्ष दोनों जांच में सहयोग करेंगे।

दोबारा पोस्टमार्टम भी हुआ

सुनवाई में अदालत को बताया गया कि दिल्ली AIIMS के डॉक्टरों की टीम भोपाल गई थी और वहां ट्विशा शर्मा का दोबारा पोस्टमार्टम किया गया। इसके बाद शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की है। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि सीबीआई जल्द जांच शुरू करेगी।

सार्वजनिक बयान देने से बचना है

अदालत ने पीड़ित परिवार और आरोपी पक्ष दोनों से कहा कि वे मीडिया में बयान देने के बजाय अपनी बात जांच एजेंसियों के सामने रखें। कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक बयानबाजी से जांच प्रभावित हो सकती है और इससे गवाहों पर भी असर पड़ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मीडिया से यह भी अनुरोध किया कि मामले से जुड़े संभावित गवाहों और आरोपियों के गैरजरूरी इंटरव्यू या बयान न दिखाए जाएं। अदालत का कहना था कि इससे जांच की दिशा बदल सकती है और सच तक पहुंचने में दिक्कत आ सकती है।

आरोपी पक्ष ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान आरोपी परिवार की तरफ से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे पेश हुए। उन्होंने अदालत से कहा कि यह स्पष्ट किया जाए कि सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने का असर किसी भी पक्ष के कानूनी अधिकारों पर नहीं पड़ेगा।

इस पर CJI सूर्यकांत ने साफ शब्दों में कहा, “बिल्कुल।” यानी अदालत में सुनवाई जारी रहने के बावजूद दोनों पक्ष अपने कानूनी विकल्प इस्तेमाल कर सकते हैं।

देशभर की नजरें इस केस पर

ट्विशा शर्मा केस इस समय देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर टीवी चैनलों तक इस मामले पर लगातार बहस हो रही है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को बेहद अहम माना जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि जांच को प्रभावित करने वाली बयानबाजी से बचना चाहिए और सभी पक्षों को कानून पर भरोसा रखना चाहिए।

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