Raebareli: उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नगर पालिका क्षेत्र के मलिकमऊ कालोनी स्थित शिव मंदिर के पास कराए जा रहे इंटरलॉकिंग और नाली निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि लाखों रुपये की लागत से कराए जा रहे निर्माण में मानकों को ताक पर रखकर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। इंटरलॉकिंग निर्माण में घटिया सीमेंटेड ईंट लगाए जाने के साथ ही नाली निर्माण में पीली ईंटों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। जिस निर्माण से लंबे समय तक लोगों को सुविधा मिलनी चाहिए, उसमें ही कथित तौर पर घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में निर्माण की मजबूती और उसकी उम्र को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

ठेकेदार से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक पर सवाल
स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में इस्तेमाल हो रही सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए ठेकेदार के साथ-साथ नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि मौके पर निर्माण कार्य की निगरानी और गुणवत्ता की जांच महज खानापूर्ति तक सीमित है। यदि समय रहते निर्माण सामग्री की जांच नहीं कराई गई तो सरकारी धन की बर्बादी के साथ ही कमजोर निर्माण की समस्या सामने आ सकती है।
स्थानीय निवासी ऋषि मिश्रा ने बताया कि शिव मंदिर के पास निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। उनका कहना है कि इंटरलॉकिंग में इस्तेमाल की जा रही ईंटों की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं है और नाली निर्माण में भी पीली ईंट लगाई जा रही है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
जांच के नाम पर खानापूर्ति का आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की निगरानी के लिए जिम्मेदार विभागीय अमला यदि समय रहते सक्रिय हो जाए तो घटिया निर्माण पर रोक लग सकती है, लेकिन मौके पर कथित तौर पर प्रभावी निगरानी नहीं होने से ठेकेदार मनमाने तरीके से काम करा रहा है। लोगों ने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की तकनीकी जांच कराने और कार्य की गुणवत्ता की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने की मांग की है।
डीएम ने जांच के बाद कार्रवाई की कही बात
मामले को लेकर जिलाधिकारी ने मीडिया के सवाल पर सामान्य बातचीत में कहा कि शिकायत मिलने पर प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। डीएम के इस बयान के बाद अब स्थानीय लोगों की नजर जांच पर टिकी है।
अब सवाल यह है कि आखिर लाखों रुपये की लागत से हो रहे इस निर्माण में यदि वास्तव में मानकों की अनदेखी हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या निर्माण कार्य की तकनीकी जांच होगी या मामला जांच के नाम पर फिर खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाएगा? फिलहाल स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।










