Dhanbad: धनबाद जिले के पूर्वी टुंडी प्रखंड में स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय की छात्राओं के लिए स्कूल तक पहुंचने का रास्ता लंबे समय से परेशानी का कारण बना हुआ था। विद्यालय में करीब 350 छात्राएं रहकर पढ़ाई करती हैं, लेकिन मुख्य सड़क से विद्यालय तक जाने वाला मार्ग बदहाल होने के कारण उन्हें रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। खासकर बारिश के दिनों में स्थिति और खराब हो जाती थी।
बारिश में कीचड़ बन जाता था पूरा रास्ता
विद्यालय तक पहुंचने वाली सड़क की हालत ऐसी थी कि बरसात शुरू होते ही कई हिस्सों में पानी और कीचड़ जमा हो जाता था। छात्राओं के साथ-साथ शिक्षकों और विद्यालय कर्मियों को भी आने-जाने में दिक्कत होती थी। पैदल चलने वाली बच्चियों के लिए फिसलन भरे रास्ते से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं था।

वार्डन ने अधिकारी के सामने रखी छात्राओं की समस्या
बच्चियों की परेशानी को देखते हुए विद्यालय की वार्डन लुईस हेंब्रम ने समाधान की पहल की। उन्होंने अंचल अधिकारी सुरेश प्रसाद वर्णवाल से मुलाकात कर विद्यालय की सड़क की स्थिति से अवगत कराया। वार्डन ने अधिकारी से सड़क की मरम्मत कराने के लिए सहयोग मांगा, ताकि छात्राओं को रोजाना होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।
सीओ ने कंपनी से किया सामाजिक सरोकार का आग्रह
समस्या सामने आने के बाद अंचल अधिकारी सुरेश प्रसाद वर्णवाल ने इसका व्यावहारिक रास्ता तलाशा। क्षेत्र में इन दिनों नेशनल हाईवे-419 (NH-419) के निर्माण का काम चल रहा है। इस परियोजना से जुड़ी त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन कंपनी से सीओ ने विद्यालय की सड़क की स्थिति सुधारने का विशेष अनुरोध किया।
अधिकारी ने कंपनी प्रबंधन से इसे सामाजिक सरोकार से जोड़ते हुए विद्यालय की जर्जर सड़क को दुरुस्त कराने की अपील की। छात्राओं की सुविधा से जुड़ी इस मांग पर कंपनी ने भी सकारात्मक रुख अपनाया।
कंपनी ने आगे बढ़कर कराया सड़क मरम्मत का काम
सीओ की पहल के बाद त्रिवेणी कंस्ट्रक्शन ने विद्यालय तक जाने वाले खराब रास्ते की मरम्मत का काम शुरू कराया। अब सड़क की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हो गई है और विद्यालय आने-जाने में छात्राओं को काफी सहूलियत मिलने लगी है।
350 छात्राओं के लिए आसान हुआ रोज का सफर
सड़क की मरम्मत पूरी होने के बाद विद्यालय में रहने वाली करीब 350 छात्राओं को सीधे तौर पर राहत मिली है। जिस रास्ते से गुजरना पहले बारिश में मुश्किल होता था, अब वहां आवागमन पहले से अधिक सुगम हो गया है। इस पहल ने यह भी दिखाया कि किसी छोटी लेकिन जरूरी समस्या को गंभीरता से लिया जाए तो स्थानीय स्तर पर उसका समाधान संभव है।
वार्डन की पहल और प्रशासन का सहयोग बना मिसाल
इस पूरे मामले में खास बात यह रही कि समस्या को लेकर विद्यालय की वार्डन ने पहल की और अंचल अधिकारी ने उसे आगे बढ़ाते हुए संबंधित कंपनी से सहयोग मांगा। कंपनी ने भी सकारात्मक पहल कर सड़क की मरम्मत करा दी। प्रशासन, विद्यालय प्रबंधन और निर्माण कंपनी के समन्वय से छात्राओं को मिली यह सुविधा इलाके में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है।










