Odisha Flood: बाढ़ के पानी में फंसी मां और नवजात तक पहुंची बांस की नाव, तीन दिन बाद घर लौटे दोनों; ओडिशा से सामने आई दर्दनाक तस्वीर

Odisha Flood: सड़कें डूबीं, घरों के बाहर पानी और मगरमच्छ का डर; प्रसव पीड़ा के बीच महिला को आधी रात नाव से निकाला गया, नवजात के साथ घर लौटने में लगे तीन दिन

Odisha Flood: ओडिशा के भद्रक जिले के बसुदेबपुर इलाके से बाढ़ के बीच मां और नवजात की जिंदगी से जुड़ी ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल खड़े करती है। लगातार बारिश और जलभराव के कारण बसुदेबपुर ब्लॉक की जगन्नाथ प्रसाद पंचायत के दधिभामनपुर पाल इलाके में अब भी पानी जमा है। कई जगह सड़कों पर पानी बह रहा है और लोगों का सामान्य जनजीवन प्रभावित है।

प्रसव पीड़ा शुरू हुई तो बढ़ गई परिवार की चिंता

बाढ़ के पानी से घिरे घर में एक गर्भवती महिला को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। बाहर निकलने का रास्ता पानी में डूबा था। हालात ऐसे थे कि परिवार के सामने महिला को सुरक्षित अस्पताल या सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया। रात के समय बढ़ी परेशानी के बीच स्थानीय लोगों की मदद से महिला को नाव के सहारे बाहर निकालने की कोशिश की गई।

आधी रात को बांस की नाव बनी सहारा

बताया गया कि पानी से घिरे इलाके में महिला को बाहर निकालने के लिए बांस से बनी नाव का सहारा लिया गया। अंधेरे और बाढ़ के पानी के बीच यह सफर परिवार के लिए बेहद जोखिम भरा रहा। पानी का बहाव और आसपास मौजूद मगरमच्छों का डर अलग चिंता पैदा कर रहा था। इसके बावजूद महिला को सुरक्षित निकालने की कोशिश जारी रही और आखिरकार उसे बाढ़ग्रस्त इलाके से बाहर ले जाया गया।

तीन दिन बाद नवजात के साथ घर लौटी मां

महिला ने बच्चे को जन्म दिया और इसके बाद मां और नवजात को सुरक्षित रखने की कोशिश की गई। करीब तीन दिन बाद दोनों वापस अपने घर पहुंचे। घर लौटने के बाद भी चारों तरफ पानी और मुश्किल हालात ने परिवार की चिंता कम नहीं की। नवजात बच्चे के साथ पानी से घिरे घर में रहना अपने आप में बड़ी चुनौती बना हुआ है।

नवजात के लिए बाढ़ में नाव का सफर कितना सुरक्षित?

इस घटना ने बाढ़ के दौरान गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामान्य परिस्थितियों में अस्पताल तक पहुंचना आसान होता है, लेकिन बाढ़ के दौरान सड़कें डूब जाने से मरीजों को नाव या स्थानीय साधनों पर निर्भर होना पड़ता है। खासकर नवजात शिशु के मामले में ठंडे पानी, तेज बहाव और असुरक्षित परिवहन का खतरा चिंता बढ़ाता है।

प्रशासनिक तैयारियों पर उठे सवाल

बसुदेबपुर की इस घटना ने बाढ़ नियंत्रण और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर किसी गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान पानी से घिरे घर से नाव के सहारे निकालना पड़े, तो यह बताता है कि आपदा की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कितनी मुश्किल हो सकती है। स्थानीय लोगों के लिए राहत और बचाव की व्यवस्था मजबूत करना बेहद जरूरी है, ताकि किसी आपात स्थिति में मरीजों को जोखिम उठाकर बाहर न निकालना पड़े।

पानी घटा, लेकिन परेशानी अभी बाकी

इलाके में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने की बात सामने आ रही है, लेकिन कई हिस्से अब भी जलमग्न हैं। मां और नवजात के घर लौटने के बाद परिवार के सामने अब स्वास्थ्य और सुरक्षा की चुनौती है। बारिश का दौर जारी रहने पर जलस्तर फिर बढ़ने की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में दधिभामनपुर पाल समेत बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था और चिकित्सा सहायता पर लोगों की नजर बनी हुई है।

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