Raebareli: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रायबरेली दौरे को लेकर पूरा प्रशासनिक अमला और नगर पालिका प्रशासन शहर को चमकाने में जुटा रहा। सड़कों की सफाई से लेकर पेड़ों की कटाई-छंटाई, नालों की सफाई और खुले नालों पर ढक्कन लगाने तक युद्धस्तर पर काम कराया गया। लेकिन मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल से महज करीब 100 से 150 मीटर की दूरी पर खुले नाले में गिरकर एक साइकिल सवार की मौत ने प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
बताया जा रहा है कि 23 अगस्त की शाम बरगद चौराहे के पास एक साइकिल सवार खुले पड़े नाले में गिर गया। नाले में डूबने से उसकी मौत हो गई। घटना की सबसे गंभीर बात यह है कि घटनास्थल नेहरू नगर क्रॉसिंग के पास उस स्थान से बेहद नजदीक है, जहां राणा बेनी माधव की प्रतिमा स्थापित है और जिसका अनावरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया।

मुख्यमंत्री के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था, आम जनता के लिए खुले नाले!
मुख्यमंत्री के आगमन से पहले प्रशासन ने शहर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिन रास्तों से मुख्यमंत्री का काफिला गुजरना था, वहां सफाई, रंगाई-पुताई, पेड़ों की छंटाई और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। खुले नालों को ढकने और सड़कों को व्यवस्थित करने का काम भी कराया गया।
लेकिन सवाल यह है कि क्या शहर की व्यवस्था सिर्फ मुख्यमंत्री के काफिले के रास्ते तक सीमित है?
जिस रास्ते से आम नागरिक रोज गुजरते हैं, वहां खुले और जाम नाले आखिर किसकी नजर में नहीं आते? यदि प्रशासन मुख्यमंत्री के आने की सूचना पर कुछ घंटों में व्यवस्था बदल सकता है तो आम जनता की सुरक्षा के लिए यही गंभीरता पहले से क्यों नहीं दिखाई गई?
अधिकारियों के आवागमन वाले इलाके में भी नहीं दिखा खुला नाला?
घटनास्थल के आसपास राजकीय कॉलोनी भी बताई जा रही है। जिले के अधिकारियों और कर्मचारियों का इस क्षेत्र से लगातार आवागमन रहता है। ऐसे में सवाल और गंभीर हो जाता है कि आखिर जिम्मेदार अधिकारियों को यह खुले नाले क्यों नहीं दिखाई दिए?
क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था?
आज एक व्यक्ति की जान चली गई। अब उसके परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि घर का भरण-पोषण कैसे होगा। यदि मृतक परिवार का कमाने वाला सदस्य था तो उसके जाने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पर क्या असर पड़ेगा, इसकी जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
नगर पालिका, एनएचएआई या जिला प्रशासन—जिम्मेदार कौन?
इस हादसे के बाद जिम्मेदारी को लेकर विभागों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू होना स्वाभाविक है। कोई इसे नगर पालिका की जिम्मेदारी बता सकता है तो कोई सड़क या नाले के अधिकार क्षेत्र का हवाला देकर जिम्मेदारी दूसरे विभाग पर डाल सकता है। लेकिन जनता का सीधा सवाल है—आखिर जिम्मेदार कौन है?
यदि सड़क किनारे खुला नाला जानलेवा स्थिति में पड़ा था तो उसकी सूचना संबंधित विभाग तक क्यों नहीं पहुंची? यदि सूचना थी तो उसे बंद क्यों नहीं कराया गया? और यदि प्रशासन को इसकी जानकारी ही नहीं थी तो फिर शहर की निगरानी और सफाई व्यवस्था पर करोड़ों के दावे किस काम के हैं?
मुख्यमंत्री के दौरे ने खोल दी व्यवस्था की पोल!
मुख्यमंत्री के आगमन पर शहर के जिन हिस्सों को आनन-फानन में चमकाया गया, वही व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। एक तरफ मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए हर गली और सड़क को व्यवस्थित करने की कवायद होती रही, वहीं दूसरी तरफ कार्यक्रम स्थल से कुछ ही दूरी पर खुले नाले में एक व्यक्ति की जिंदगी खत्म हो गई।
यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि शहरी व्यवस्था और विभागीय जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल है।
प्रशासन यदि वीआईपी दौरे के लिए रात-दिन एक कर सकता है तो आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं कर सकता? खुले नालों पर ढक्कन लगाना, जाम नालों की सफाई कराना और सड़कों को सुरक्षित बनाना किसी मुख्यमंत्री के दौरे की मजबूरी नहीं, बल्कि जनता के प्रति प्रशासन की मूल जिम्मेदारी है।
अब सवालों से भाग नहीं सकता प्रशासन
इस मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उस खुले नाले को समय रहते बंद क्यों नहीं किया गया। क्या किसी और हादसे के बाद प्रशासन जागेगा? क्या संबंधित विभाग के अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण करेंगे? क्या खुले नालों की सूची बनाकर उन्हें तत्काल सुरक्षित कराया जाएगा? और सबसे अहम—क्या इस हादसे की जिम्मेदारी तय होगी?
मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान जिस शहर को कुछ घंटों के लिए चाक-चौबंद दिखाने की कोशिश की गई, उसी शहर की जमीनी तस्वीर ने एक व्यक्ति की जान लेकर प्रशासन को आईना दिखा दिया है।
अब जरूरत केवल बयान जारी करने की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करने और व्यवस्था में स्थायी सुधार करने की है। एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया है। यह मौत प्रशासनिक लापरवाही की जांच और जवाबदेही का सवाल छोड़ गई है।










