भारत में डायबिटीज का बढ़ता खतरा, हर पांचवें पुरुष में हाई ब्लड शुगर; NFHS के आंकड़ों ने चौंकाया

NFHS के आंकड़ों में बड़ा खुलासा, पुरुषों में बढ़ रहा हाई ब्लड शुगर का खतरा; बदलती जीवनशैली और खानपान ने बढ़ाई चिंता

भारत में गैर-संचारी बीमारियों का दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के 2023-24 के आंकड़ों में हाई ब्लड शुगर और अधिक वजन की समस्या में साफ बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास बात यह है कि पुरुषों में हाई ब्लड शुगर का स्तर 20.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यानी 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र के हर पांच पुरुषों में करीब एक व्यक्ति इससे प्रभावित है।

पुरुषों में हाई ब्लड शुगर ने पकड़ी रफ्तार

NFHS के मुताबिक, 2019-21 में 15 वर्ष से अधिक उम्र के पुरुषों में हाई या बहुत ज्यादा ब्लड शुगर अथवा शुगर नियंत्रित करने की दवा लेने वालों का अनुपात 15.6 प्रतिशत था। अब यह बढ़कर 20.9 प्रतिशत हो गया है। महिलाओं में भी यह आंकड़ा 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 17.8 प्रतिशत पहुंच गया। सर्वे में ब्लड शुगर की श्रेणी 140 mg/dl से ऊपर के स्तर या उसे नियंत्रित करने के लिए दवा लेने की स्थिति को शामिल किया गया है।

महिलाओं में भी बढ़ी परेशानी

हाई ब्लड शुगर का बढ़ता आंकड़ा सिर्फ पुरुषों तक सीमित नहीं है। महिलाओं में भी करीब 4.3 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी सामने आई है। विशेषज्ञों के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर शरीर के कई अंगों पर असर डाल सकता है। ऐसे में केवल बीमारी सामने आने के बाद इलाज कराने के बजाय शुरुआती जांच और बचाव पर जोर देना जरूरी हो जाता है।

मोटापा भी बढ़ा रहा है खतरा

ब्लड शुगर के साथ वजन बढ़ने की तस्वीर भी चिंता पैदा करती है। 15-49 वर्ष की महिलाओं में ओवरवेट या मोटापे का अनुपात 24 प्रतिशत से बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया। इसी आयु वर्ग के पुरुषों में यह आंकड़ा 22.9 प्रतिशत से बढ़कर 27.3 प्रतिशत दर्ज किया गया। यानी अतिरिक्त वजन अब बड़ी आबादी के लिए सिर्फ फिटनेस का मुद्दा नहीं, बल्कि भविष्य की बीमारियों से जुड़ा जोखिम भी बन रहा है।

बीपी के आंकड़ों में राहत की तस्वीर

डायबिटीज और मोटापे के बीच ब्लड प्रेशर के आंकड़े कुछ राहत जरूर देते हैं। NFHS में महिलाओं में बढ़ा हुआ रक्तचाप 21.3 प्रतिशत से घटकर 19.4 प्रतिशत और पुरुषों में 24 प्रतिशत से घटकर 22.1 प्रतिशत दर्ज हुआ। हालांकि इसे पूरी तरह समस्या खत्म होने का संकेत नहीं माना जा सकता, लेकिन पिछले सर्वे की तुलना में गिरावट सकारात्मक बदलाव जरूर है।

बदलती दिनचर्या से बढ़ रहा जोखिम

लंबे समय तक बैठे रहना, नियमित व्यायाम की कमी, अधिक कैलोरी वाला भोजन और बढ़ता वजन ऐसी परिस्थितियां हैं जिनसे मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

NFHS का संदेश साफ है

NFHS की तस्वीर बताती है कि भारत एक तरफ स्वास्थ्य सेवाओं और कई प्रमुख स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार कर रहा है, तो दूसरी तरफ लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का बोझ भी बढ़ रहा है। खासकर हाई ब्लड शुगर और मोटापे में बढ़ोतरी आने वाले वर्षों के लिए चेतावनी है। समय पर जांच, बेहतर खानपान, पर्याप्त गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार उपचार से जोखिम को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है।

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