बोकारो थर्मल स्थित कार्मेल उच्च विद्यालय (Carmel High School) के विद्यार्थियों ने इस बार रक्षा बंधन को सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं रखा। पर्व के मौके पर छात्र-छात्राओं ने देश की सीमाओं की सुरक्षा में जुटे भारतीय सैनिकों को याद किया। बच्चों ने अपने हाथों से राखियां तैयार कीं और उनके साथ शुभकामना संदेश लिखकर सीमा पर तैनात जवानों तक भेजने की पहल की।
राखी में भाईचारे के साथ राष्ट्रप्रेम

विद्यार्थियों के लिए यह पहल भावनाओं से जुड़ी रही। उन्होंने माना कि सैनिक अपने घर-परिवार से दूर रहकर कठिन मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की रक्षा करते हैं। ऐसे में रक्षा बंधन के दिन उन्हें राखी भेजना एक सामान्य परंपरा से कहीं अधिक है। यह उन जवानों के प्रति सम्मान जताने का माध्यम है, जो करोड़ों देशवासियों की सुरक्षा के लिए हर समय तैयार रहते हैं।
बच्चों ने अपने हाथों से तैयार कीं राखियां
विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने सैनिकों के लिए भेजी जाने वाली राखियों को विशेष लगाव के साथ तैयार किया। राखियों के साथ लिखे संदेशों में जवानों के प्रति सम्मान, स्नेह और उनके सुरक्षित रहने की कामना की गई। बच्चों ने अपनी भावनाओं को कागज पर उतारते हुए सैनिकों को यह एहसास कराने की कोशिश की कि देश का हर नागरिक उनके त्याग को याद करता है।
सरहद के जवानों के नाम भेजा अपनापन
विद्यालय की ओर से भेजी गई राखियों का उद्देश्य सीमा पर तैनात सैनिकों तक विद्यार्थियों की भावनाएं पहुंचाना है। बच्चों का कहना रहा कि सैनिक भले ही अपने परिवार से दूर हों, लेकिन देश के लोग उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं। राखी के इन धागों में इसी अपनत्व और भरोसे की भावना को पिरोया गया है।
विद्यालय ने बताया भावी पीढ़ी के लिए जरूरी कदम
कार्मेल उच्च विद्यालय की प्रधानाचार्या सिस्टर प्रेमलता लॉरेंस ए.सी. ने इस पहल को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में देशभक्ति के साथ सामाजिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की भावना मजबूत होती है। सैनिकों के प्रति सम्मान केवल शब्दों तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों के व्यवहार और सोच में भी दिखाई दे, यही इस पहल का उद्देश्य है।
रक्षा बंधन बना देशभक्ति का पर्व
राखी भेजने की इस पहल ने विद्यालय परिसर में रक्षा बंधन की खुशियों को एक अलग अर्थ दिया। विद्यार्थियों ने रिश्तों के इस पर्व को राष्ट्र की रक्षा करने वाले जवानों के सम्मान से जोड़ दिया। उनके बनाए राखी के धागे अब सरहद पर तैनात सैनिकों तक पहुंचकर यह संदेश देंगे कि देश उनके साहस, कर्तव्य और बलिदान को कभी नहीं भूलता।










