Raebareli: जिस अमित को राहुल गांधी ने साथ बैठाकर आरक्षण की लड़ाई का भरोसा दिया, वही आज विपक्ष के खिलाफ गरजते नजर आए

69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षण विवाद में बदले सुर! रायबरेली के सारस चौराहे पर ‘आरक्षण बचाओ यात्रा’ के दौरान अमित ने सरकार के साथ विपक्ष को भी घेरा

Raebareli: 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगतियों को लेकर सोमवार को रायबरेली के सारस चौराहे पर हुए प्रदर्शन में एक ऐसा राजनीतिक दृश्य देखने को मिला, जिसने सियासी गलियारों में चर्चाओं को हवा दे दी। आरक्षण बचाओ यात्रा में शामिल अमित, जिन्हें पूर्व में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने साथ बैठाकर आरक्षण के मुद्दे पर लड़ाई लड़ने की बात कही थी, आज उसी मुद्दे को लेकर विपक्ष के खिलाफ भी खुलकर बोलते नजर आए।

सोमवार, 31 अगस्त 2026 को करीब एक बजे आरक्षण बचाओ यात्रा सारस चौराहे पहुंची। ओबीसी संघ के पदाधिकारियों और 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों ने हाथों में तिरंगा और झंडे लेकर सरकार के साथ-साथ विपक्ष के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के हाथ में मौजूद बैनर पर ‘आरक्षण महाघोटाला—69000 शिक्षक भर्ती’ लिखा था।

प्रदर्शन के दौरान अमित की मौजूदगी खास चर्चा का विषय बनी रही। बताया गया कि आरक्षण बचाओ यात्रा के दौरान राहुल गांधी ने अमित को अपने साथ बैठाकर इस लड़ाई में साथ खड़े होने की बात कही थी। उस समय यह तस्वीर और बयान आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष की सक्रियता के तौर पर देखे गए थे। लेकिन अब हालात ऐसे नजर आ रहे हैं कि अमित खुद विपक्ष को भी कटघरे में खड़ा करते दिखाई दिए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 69000 शिक्षक भर्ती में ओबीसी और एससी वर्ग के अभ्यर्थियों को उनके आरक्षण के अधिकार के मुताबिक लाभ नहीं मिला। उनका कहना है कि ओबीसी को 27 प्रतिशत और एससी को 21 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। इसी मांग को लेकर इलाहाबाद विश्वविद्यालय से लखनऊ के ईको गार्डन तक आरक्षण बचाओ यात्रा निकाली जा रही है।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के अधिकार और सामाजिक न्याय के लिए है। इसी वजह से प्रदर्शन में सरकार के साथ विपक्ष के खिलाफ भी नारेबाजी की गई।

अमित का विपक्ष के खिलाफ मुखर होना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि जिस राजनीतिक खेमे के नेता के साथ बैठकर उन्होंने आरक्षण की लड़ाई में साथ होने का संदेश दिया था, उसी खेमे के खिलाफ आज उनकी आवाज सुनाई दी। इससे यह सवाल भी उठने लगा है कि 69000 शिक्षक भर्ती का आरक्षण विवाद अब केवल सरकार बनाम अभ्यर्थियों का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक दलों और विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि आरक्षण के नाम पर राजनीति नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के साथ न्याय चाहिए। उनका कहना है कि जब तक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े आरक्षण विवाद का स्थायी और न्यायपूर्ण समाधान नहीं होता, आंदोलन की आवाज दबने वाली नहीं है।

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