Raebareli: दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश के सभी जनपदों की सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण माने जाने वाली सदर विधानसभा सीट की सियासत एक बार फिर करवट लेती नजर आ रही है। पूर्व प्रत्याशी और चर्चित सपा नेता आरपी यादव को आजीवन कारावास की सजा होने के बाद सीट पर राजनीतिक गणित तेजी से बदलने लगा है। समाजवादी पार्टी में संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है, वहीं सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आगामी चुनाव में सदर सीट सपा के खाते में रहेगी या गठबंधन की स्थिति में कांग्रेस के हिस्से जाएगी?
आरपी यादव के जेल जाने के बाद सपा के कई नेताओं की ओर से टिकट को लेकर दावेदारी की चर्चा तेज है। हाल ही में सपा की सदस्यता ग्रहण करने वाली दिवंगत पूर्व विधायक अखिलेश सिंह की बहन पूनम सिंह का नाम भी सदर सीट के संभावित दावेदारों में सामने आया है। वहीं शशिकांत शर्मा की दावेदारी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। इनमें शशिकांत शर्मा के नाम पर सपा के भीतर गंभीरता से विचार किए जाने के कयास लगाए जा रहे हैं।

हालांकि असली पेच आरपी यादव के प्रभाव और उनके समर्थक आधार को लेकर है। यही वजह है कि सदर सीट पर किसी भी दल के संभावित प्रत्याशी के लिए आरपी यादव का रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके समर्थक आधार को नजरअंदाज करके चुनावी मैदान में उतरना किसी भी दावेदार के लिए आसान नहीं होगा।
गठबंधन हुआ तो कांग्रेस के पास जा सकती है सीट
यदि सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों का बंटवारा होता है और रायबरेली सदर सीट कांग्रेस के खाते में जाती है तो राही ब्लॉक प्रमुख धर्मेंद्र बहादुर यादव भी कांग्रेस से उम्मीदवार हो सकते हैं या दावेदार के तौर पर उभर सकते हैं।लेकिन उनके लिए भी यह रास्ता आसान नहीं होगा क्योंकि यह ब्लॉक प्रमुख ही का चुनाव नहीं है जो पैसों से खरीदा जा सके यह जनता का चुनाव है और जनता का मूड क्या है इस बार कुछ अलग ही रहेगा। बीते दिनों राहुल गांधी की एक बड़ी सभा का आयोजन भी इनके द्वारा ब्लॉक स्तर पर किया गया था।
सियासी चर्चा यह भी है कि यदि धर्मेंद्र बहादुर यादव को कांग्रेस प्रत्याशी बनाती है और उन्हें आरपी यादव का समर्थन मिलता है, तो मुकाबले का समीकरण काफी हद तक बदल सकता है।हालांकि समर्थन को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, इसलिए इसे फिलहाल संभावित राजनीतिक गणित के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
सदर में ओबीसी कार्ड पर दांव की चर्चा
रायबरेली सदर सीट पर इस समय विधायक भाजपा से अदिति सिंह है जो अभी तक सबसे मजबूत और सशक्त मानी जा रही है। क्योंकि आरपी यादव के जेल जाने के बाद अदिति सिंह के सामने कोई और बड़ा उम्मीदवार दिखाई नहीं दे रहा है। हां लेकिन भाजपा से पुष्पेंद्र सिंह सपा से दीपू तिवारी समेत अन्य कई लोग अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं सबसे दिलचस्प सवाल प्रत्याशी के नाम से ज्यादा जातीय और सामाजिक समीकरण को लेकर है। राजनीतिक जानकारों के बीच चर्चा है कि यदि कांग्रेस इस सीट पर उतरती है तो पार्टी ओबीसी चेहरे पर दांव लगा सकती है।
फिलहाल सपा के दावेदारों से लेकर कांग्रेस के संभावित चेहरों तक सभी की निगाहें गठबंधन के फैसले और आरपी यादव की अगली राजनीतिक भूमिका पर टिकी हैं। इतना तय है कि आरपी यादव की अनुपस्थिति ने सदर सीट की सियासत में खाली जगह जरूर पैदा की है, लेकिन उस जगह को भरना किसी नए चेहरे के लिए आसान नहीं होगा।
अब देखना यह है कि सदर की सियासी बिसात पर सपा अपना मोहरा उतारती है या गठबंधन का दांव कांग्रेस को मौका देता है। फैसला पार्टियों के हाथ में है, लेकिन फिलहाल सदर सीट पर हर राजनीतिक चाल का केंद्र आरपी यादव का प्रभाव, गठबंधन और ओबीसी समीकरण बन चुका है।










