Mathura विद्युत विभाग में नए बिजली संयोजन को लेकर कथित भ्रष्टाचार के आरोप, जांच की मांग तेज

नए विद्युत संयोजन के लिए उपभोक्ताओं को तकनीकी अड़चनों और आपत्तियों में उलझाने का दावा, अधिकारियों से शिकायत के बाद जांच की मांग तेज

Mathura: मथुरा जनपद के विद्युत विभाग में नए बिजली कनेक्शन को लेकर कथित अनियमितताओं की शिकायतों ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि नए विद्युत संयोजन के लिए आवेदन करने वाले कुछ उपभोक्ताओं को अनावश्यक तकनीकी आपत्तियों और विभागीय प्रक्रियाओं में उलझाया जा रहा है। आरोप यह भी है कि कुछ मामलों में काम कराने के लिए कथित तौर पर सुविधा शुल्क की मांग की जाती है।

सर्वर डाउन से लेकर तकनीकी अड़चन तक

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक, आवेदन के बाद कभी सर्वर की समस्या तो कभी तकनीकी कारण बताकर उपभोक्ताओं को कनेक्शन देने में असमर्थता जताई जाती है। लंबे समय तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ने पर कुछ उपभोक्ता परेशान होकर संबंधित लोगों से संपर्क करते हैं। आरोप है कि इसी दौरान कथित बिचौलियों के माध्यम से रकम देने पर काम कराने का भरोसा दिलाया जाता है।

रात में फोन करने के भी आरोप

मामले को लेकर कुछ शिकायतकर्ताओं ने यह दावा भी किया है कि उन्हें देर शाम या रात के समय फोन कर बिजली कनेक्शन से जुड़ी व्यवस्था करने की बात कही गई। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि विभागीय प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है तो उपभोक्ताओं को इस तरह के कथित संपर्कों का सामना क्यों करना पड़ रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए।

आपत्तियों के बाद दोबारा आवेदन का दबाव

शिकायतों में यह भी कहा गया है कि कई आवेदन अलग-अलग आपत्तियां लगाकर निरस्त कर दिए जाते हैं। इसके बाद उपभोक्ताओं को नए आवेदन नंबर, शपथ पत्र और दूसरे दस्तावेजों के साथ फिर से प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है। बार-बार आवेदन निरस्त होने से उपभोक्ताओं का समय और पैसा दोनों खर्च होने का दावा किया गया है।

पैसे देने पर आसान हो जाती है राह?

शिकायतकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिन मामलों में कथित तौर पर मोटी रकम का लेनदेन होता है, वहां कनेक्शन से जुड़ी अड़चनें तेजी से दूर हो जाती हैं। वहीं दूसरी ओर सामान्य उपभोक्ताओं को कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। हालांकि यह आरोप जांच का विषय हैं और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

न्यायालयों के आदेशों के पालन पर भी सवाल

मामले में हाईकोर्ट, जिला जज और सीजेएम न्यायालय से जुड़े आदेशों का उल्लेख करते हुए शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि कुछ मामलों में न्यायिक निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यदि न्यायालय के आदेशों के बावजूद उपभोक्ताओं को नियमानुसार बिजली संयोजन नहीं मिल रहा है तो पूरे मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंची शिकायत

बताया गया है कि पूरे मामले की जानकारी मुख्य अभियंता और अधिशासी अभियंता समेत विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जा चुकी है। शिकायतकर्ताओं की मांग है कि आरोपों की विभागीय स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई हो।

एंटी करप्शन जांच की चर्चा

अब मामले में एंटी करप्शन टीम की संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कथित लेनदेन से संबंधित दस्तावेज और अन्य साक्ष्य जांच एजेंसी या सक्षम मंच के सामने प्रस्तुत किए जा सकते हैं। यदि जांच शुरू होती है तो शिकायतों की वास्तविकता और जिम्मेदार लोगों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है।

जांच से साफ होगी असली तस्वीर

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिजली कनेक्शन जैसी आवश्यक सेवा के लिए आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं को कथित तौर पर इतनी परेशानियों का सामना क्यों करना पड़ रहा है। क्या विभाग इन आरोपों की स्वतंत्र जांच कराएगा और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी, या शिकायतें विभागीय फाइलों तक ही सीमित रहेंगी?

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