Bokaro Thermal: अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में BTPS का प्रतिनिधिमंडल शामिल

नवी मुंबई में हिंदी दिवस पर आयोजित हुआ छठा अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन

Bokaro Thermal: राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से हिंदी दिवस-2026 के अवसर पर 14 सितंबर को सिडको एक्जीबिशन सेंटर, नवी मुंबई में छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देशभर से राजभाषा से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। दामोदर घाटी निगम के बोकारो थर्मल पावर स्टेशन (BTPS) का प्रतिनिधिमंडल भी सम्मेलन में शामिल हुआ।

सम्मेलन का शुभारंभ केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने मंगलदीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम में राजभाषा विभाग की सचिव अंशुली आर्या ने देशभर से आए राजभाषा कर्मियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने हिंदी को भारतीय भाषाओं के बीच सेतु बताते हुए कहा कि हिंदी सप्तदल कमल के समान है और अन्य भारतीय भाषाएं उसकी पंखुड़ियां हैं। उन्होंने राजभाषा विभाग की ओर से विकसित ‘हिंदी शब्द-सिंधु’ पर भी प्रकाश डाला। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि “हिंदी मेरी माँ है और बाकी भारतीय भाषाएं मौसी हैं।”

सम्मेलन में ‘वंदे मातरम् और राष्ट्रीय चेतना की अभिव्यक्ति’ तथा ‘हिंदी में करियर : नए अवसर और संभावनाएं’ विषयों पर परिचर्चा भी आयोजित की गई। इसमें हिंदी के विद्वानों ने विचार रखे। पुरस्कार वितरण कार्यक्रम भी हुआ।

BTPS प्रतिनिधिमंडल ने लिया हिस्सा

बीटीपीएस की ओर से वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) पार्थ सारथी मुखर्जी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने सम्मेलन में भाग लिया। इसमें कार्यकारी प्रशिक्षु (मानव संसाधन) एवं राजभाषा प्रभारी अंकित राज, सहायक नियंत्रक (यांत्रिकी), पीजी दीनानाथ शर्मा तथा सहायक ग्रेड-I (राजभाषा) तारकेश्वर जायसवारा शामिल रहे।

उल्लेखनीय है कि बीटीपीएस ‘क’ क्षेत्र में स्थित होने के कारण डीवीसी में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार और कार्यान्वयन में लगातार अग्रणी भूमिका निभा रहा है। स्टेशन में कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के प्रयोग के साथ प्रतियोगिताओं, कार्यशालाओं, संगोष्ठियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदी के संवर्धन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। बीटीपीएस के इन प्रयासों से डीवीसी में राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूती मिली है।

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