Uttarakhand: छह नवंबर को शीतकाल के लिए बंद होंगे तृतीय केदारनाथ तुंगनाथ के कपाट, तैयारियां पूरी

वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ संपन्न होगी कपाट बंद करने की प्रक्रिया, शीतकालीन गद्दीस्थल मरकटेश्वर मंदिर में विराजमान होंगे भगवान तुंगनाथ

Uttarakhand: पंचकेदारों में तृतीय केदार के रूप में प्रसिद्ध भगवान तुंगनाथ मंदिर के कपाट शुक्रवार, छह नवंबर को शीतकालीन प्रवास के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने की निर्धारित तिथि को देखते हुए मंदिर समिति और हक-हकूकधारियों ने सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं। कपाट बंद होने के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित तुंगनाथ धाम में इस वर्ष की नियमित पूजा-अर्चना का क्रम विराम ले लेगा।

कपाट बंद करने की धार्मिक प्रक्रिया बृहस्पतिवार को शीतकालीन गद्दीस्थल मरकटेश्वर मंदिर से शुरू होगी। यहां से हक-हकूकधारी ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भगवान तुंगनाथ को शीतकालीन प्रवास के लिए आमंत्रित करने के उद्देश्य से मंदिर पहुंचेंगे। इस दौरान परंपरागत धार्मिक रस्में निभाई जाएंगी। इसके बाद शुक्रवार को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ भगवान तुंगनाथ के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

तुंगनाथ मंदिर के मठाधीश मुकेश मैठाणी ने बताया कि कपाट बंद होने की प्रक्रिया को लेकर मंदिर समिति और ग्रामीणों की ओर से सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। परंपरा के अनुसार कपाट बंद होने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल विग्रह उत्सव डोली को शीतकालीन गद्दीस्थल मरकटेश्वर मंदिर में विराजमान कराया जाएगा, जहां आगामी शीतकाल में श्रद्धालु भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे।

कपाट बंद होने के साथ ही तुंगनाथ धाम की यात्रा पर भी शीतकालीन विराम लग जाएगा। हालांकि, भगवान तुंगनाथ की पूजा-अर्चना शीतकालीन गद्दीस्थल पर नियमित रूप से जारी रहेगी। धार्मिक परंपराओं और सदियों पुरानी मान्यताओं के अनुरूप होने वाला यह आयोजन केदारनाथ क्षेत्र की आस्था और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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