Raebareli News: मौत के साये में काशीराम कॉलोनी के हजारों परिवार, बांस-बल्लियों के सहारे खड़ी बहुमंजिला इमारतें

जर्जर भवनों से आए दिन टूटकर गिर रहे प्लास्टर और छज्जे, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

Raebareli: मिल एरिया थाना क्षेत्र की काशीराम कॉलोनी में रहने वाले हजारों लोगों की जिंदगी जर्जर इमारतों के बीच खतरे में है। बहुमंजिला भवनों की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि उन्हें बांस-बल्लियों के सहारे टिकाकर रखा गया है। दीवारों में दरारें, टूटते छज्जे और जगह-जगह से उखड़ता प्लास्टर भवनों की जर्जर हालत की गवाही दे रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कदम उठाए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।

गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को शाम करीब पांच बजे कॉलोनी निवासी हितेंद्र मिश्रा ने भवनों की बदहाली को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने बताया कि जिस इमारत में उनका परिवार रहता है, वह पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। हालत यह है कि कब दीवार या छज्जे का कोई हिस्सा टूटकर नीचे गिर जाए, इसका कोई भरोसा नहीं है। मजबूरी ऐसी है कि रहने के लिए दूसरा कोई ठिकाना नहीं होने के कारण लोग जान जोखिम में डालकर इन्हीं मकानों में रहने को विवश हैं।

बताया जाता है कि इन भवनों का निर्माण मायावती सरकार के कार्यकाल में कराया गया था। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई यह कॉलोनी आज बदहाली की तस्वीर बनती जा रही है। एक-एक ब्लॉक में हजारों लोग निवास करते हैं। भवनों की मरम्मत और रखरखाव की अनदेखी का खामियाजा अब यहां रहने वाले परिवारों को भुगतना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, आए दिन प्लास्टर, छज्जे और दीवारों के हिस्से टूटकर गिरते रहते हैं। भवनों को बांस-बल्लियों के सहारे संभालने की नौबत आ गई है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर परिवारों में चिंता बनी हुई है।

बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा? क्या हजारों परिवारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसी की नहीं है? स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल सभी भवनों का तकनीकी निरीक्षण कराने, जर्जर इमारतों की मरम्मत कराने और जरूरत पड़ने पर परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की मांग की है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते कार्रवाई करते हैं या फिर काशीराम कॉलोनी के लोग इसी तरह खतरे के साये में रहने को मजबूर रहेंगे।

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