Aditya Thackeray का BJP और शिंदे गुट पर बड़ा हमला, बोले- ‘Shiv Sena सांसदों को खरीदा गया’

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। शिवसेना (Shiv Sena) के कई सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल होने की खबरों के बीच पार्टी नेता आदित्य ठाकरे (Aditya Thackeray) ने भारतीय जनता पार्टी और शिंदे गुट पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (UBT) के सांसदों को “खरीदा गया” और सत्ता के बल पर लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है।

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) से बातचीत में आदित्य ठाकरे ने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है कि शिवसेना के सांसदों को तोड़ा गया। उनका आरोप था कि भाजपा का पूरा ध्यान सरकार चलाने और जनता के मुद्दों को सुलझाने के बजाय विपक्षी दलों को तोड़ने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा, “यह लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। भाजपा का फोकस सिर्फ पार्टियां तोड़ने पर है, शासन पर नहीं।”

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, पिछले कुछ दिनों से चर्चा थी कि शिवसेना (UBT) के छह सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं। अब इन सांसदों के शिंदे खेमे में शामिल होने की खबरों ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी को बड़ा झटका दिया है। इसे महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे कथित ‘ऑपरेशन टाइगर’ का हिस्सा माना जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के छह सांसदों ने अलग समूह बनाकर लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी सौंपा है। इसके बाद उनके शिंदे गुट में औपचारिक रूप से शामिल होने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है।

आदित्य ठाकरे ने क्या कहा?

आदित्य ठाकरे ने बागी सांसदों पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने अपनी निष्ठा और प्रतिष्ठा को राजनीतिक लाभ के लिए बेच दिया है। उन्होंने कहा कि जनता ने इन नेताओं को एक विचारधारा और गठबंधन के नाम पर चुना था, लेकिन अब वे जनता के विश्वास के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिवसेना (UBT) अपने कार्यकर्ताओं और जनता के दम पर मजबूत होकर खड़ी रहेगी और ऐसे राजनीतिक दबावों के सामने झुकेगी नहीं। आदित्य ठाकरे ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी इस संकट का लोकतांत्रिक तरीके से मुकाबला करेगी।

शिवसेना (UBT) क्या कर रही है?

इस राजनीतिक संकट के बीच उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार सक्रिय नजर आ रही है। पार्टी नेतृत्व ने बागी नेताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। पार्टी ने आपात बैठकें बुलाई हैं। सांसदों और विधायकों से व्यक्तिगत स्तर पर संपर्क किया जा रहा है। पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने का संदेश दिया गया है। उद्धव ठाकरे लगातार पार्टी की मूल विचारधारा और बालासाहेब ठाकरे की विरासत का हवाला देकर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में पार्टी ने बागी सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर के बेटे कृष्णा पाटिल के खिलाफ भी कार्रवाई की है। इसे पार्टी के सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

शिंदे गुट का क्या कहना है?

दूसरी ओर, शिंदे गुट का दावा है कि उनके साथ आने वाले सांसद बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से प्रेरित हैं और वे उसी रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते हैं। शिंदे खेमे के नेताओं ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में और भी राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर भी शिंदे समर्थक नेताओं ने दावा किया है कि यह राजनीतिक अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है।

महाराष्ट्र की राजनीति पर क्या होगा असर?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़ी संख्या में सांसद शिंदे गुट में शामिल होते हैं तो यह उद्धव ठाकरे की पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक झटका साबित हो सकता है। वहीं आगामी स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य की चुनावी रणनीति पर भी इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि शिवसेना (UBT) का कहना है कि पार्टी की असली ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता हैं और कुछ नेताओं के जाने से संगठन कमजोर नहीं होगा।

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