Tel Aviv: इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गाज़ा और लेबनान में इज़रायली सैन्य अभियानों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अपनी सरकार और सेना का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि दुनिया का कोई भी देश आतंकवाद के खिलाफ इससे बेहतर तरीके से कार्रवाई नहीं कर सकता था। नेतन्याहू ने दावा किया कि इज़रायल आतंकवादियों को निशाना बनाता है और नागरिक हताहतों को कम से कम रखने के लिए असाधारण प्रयास करता है। साझा किए गए एक वीडियो में नेतन्याहू ने कहा, “कोई भी देश इससे बेहतर नहीं कर सकता था। आतंकवादी केवल नागरिकों को निशाना नहीं बनाते, बल्कि वे अपने ही नागरिकों के बीच छिपकर काम करते हैं। ऐसा करके वे दोहरा युद्ध अपराध करते हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आप इस स्थिति से कैसे निपटते हैं?”
उन्होंने कहा कि शहरी युद्ध (Urban Warfare) में नागरिकों की मौतें एक दुखद वास्तविकता होती हैं, लेकिन इज़रायली सेना का लक्ष्य हमेशा आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करना और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है। नेतन्याहू के अनुसार, दुनिया के अधिकांश शहरी संघर्षों में गैर-लड़ाकों और लड़ाकों के मारे जाने का अनुपात सात या आठ नागरिकों के मुकाबले एक लड़ाके का होता है।

प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दावा किया कि गाज़ा में यह अनुपात इससे काफी कम रहा। उन्होंने कहा कि इज़रायल के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों और आलोचनाओं के बावजूद वास्तविक आंकड़े कुछ और कहानी बयान करते हैं। उन्होंने कहा, “मैंने रक्षा मंत्रालय के शोधकर्ताओं से पूछा कि लेबनान में यह अनुपात क्या है। आज मुझे जो दस्तावेज़ मिला, उसके अनुसार वहां प्रत्येक एक नागरिक के मुकाबले पांच आतंकवादी मारे गए हैं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर एक आतंकवादी के बदले पांच नागरिक मारे गए, बल्कि इसके उलट एक नागरिक के मुकाबले पांच आतंकवादी मारे गए। नेतन्याहू ने इसे अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि दुनिया की शायद ही कोई सेना आतंकवादियों को निशाना बनाने और नागरिक क्षति को कम करने के लिए इतनी दूर तक जाती हो।
उन्होंने कहा, “इज़रायली सेना आतंकवादियों को निशाना बनाने और नागरिक हताहतों को कम करने के लिए जिस स्तर तक जाती है, वह असाधारण है। इसके लिए उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए, न कि उसकी निंदा।”
हालांकि, नेतन्याहू के इन दावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। संयुक्त राष्ट्र, कई मानवाधिकार संगठनों और विभिन्न देशों ने गाज़ा में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत पर चिंता व्यक्त की है और स्वतंत्र जांच की मांग की है। दूसरी ओर, इज़रायल का कहना है कि हमास जैसे संगठन अस्पतालों, स्कूलों और रिहायशी इलाकों का इस्तेमाल अपने ठिकानों के रूप में करते हैं, जिससे सैन्य कार्रवाई और अधिक जटिल हो जाती है।
इज़रायल-हमास संघर्ष के बाद से पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ा है। गाज़ा के अलावा लेबनान सीमा पर भी इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच टकराव की घटनाएं सामने आती रही हैं। ऐसे में नेतन्याहू के इस बयान को इज़रायल की सैन्य रणनीति का बचाव करने और अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का जवाब देने के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक शहरी युद्धों में नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। वहीं, विभिन्न पक्षों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल, नेतन्याहू के इस बयान ने एक बार फिर गाज़ा और लेबनान में जारी संघर्ष, नागरिक हताहतों और युद्ध के मानवीय पहलुओं को लेकर वैश्विक बहस को तेज कर दिया है।










