अमेठी में रेलवे निर्माण कार्य पर उठे सवाल, बिना सुरक्षा उपकरण काम कर रहे मजदूर

गुरु गोरखनाथ स्टेशन पर अंडरपास निर्माण में लापरवाही, हादसे का खतरा बढ़ा; स्थानीय लोगों ने की जांच की मांग

अमेठी जिले के जायस थाना क्षेत्र में स्थित गुरु गोरखनाथ रेलवे स्टेशन इन दिनों निर्माण कार्य के चलते चर्चा में है, लेकिन वजह विकास नहीं बल्कि सुरक्षा में लापरवाही है। यहां अंडरग्राउंड पास का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, मगर मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मौके की तस्वीरें और हालात बताते हैं कि काम के दौरान जरूरी सुरक्षा नियमों को लगभग नजरअंदाज कर दिया गया है।

बिना हेलमेट और उपकरण के काम कर रहे मजदूर

निर्माण स्थल पर काम कर रहे मजदूरों की स्थिति चिंताजनक है। न उनके सिर पर हेलमेट है, न हाथों में दस्ताने और न ही ऊंचाई पर काम करने के लिए कोई सेफ्टी बेल्ट। तेज धूप और भारी निर्माण सामग्री के बीच वे सीधे जोखिम उठाकर काम कर रहे हैं। यह हालात किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे सकते हैं।

मौके पर दिखी प्रमुख कमियां:

  • हेलमेट और सेफ्टी गियर का अभाव
  • ऊंचाई पर काम के लिए सुरक्षा व्यवस्था नहीं
  • प्राथमिक चिकित्सा सुविधा का अभाव
  • कार्यस्थल पर सुरक्षा निगरानी की कमी

स्थानीय लोगों ने जताई चिंता

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इतने बड़े बजट की परियोजना में सुरक्षा की अनदेखी बेहद गंभीर मामला है। लोगों ने आशंका जताई कि यदि इसी तरह काम चलता रहा तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों और राहगीरों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

करोड़ों की परियोजना पर उठे सवाल

यह अंडरपास निर्माण परियोजना करोड़ों रुपये की बताई जा रही है, जिसका उद्देश्य यातायात को सुगम बनाना है। लेकिन जिस तरह से काम हो रहा है, उससे परियोजना की गुणवत्ता और निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन उतना ही जरूरी है जितना गुणवत्ता का।

कार्रवाई की मांग तेज

क्षेत्रीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबंधित विभाग से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो। साथ ही मजदूरों को बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

प्रशासन की भूमिका पर नजर

अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अगर समय रहते इस मामले में सुधार नहीं किया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। सवाल सिर्फ निर्माण का नहीं, बल्कि मजदूरों की जिंदगी का है।

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