20 रुपए की इडली प्लेट ने बदली किशन तांती की जिंदगी, घर का सांभर-चटनी बना ‘Wow Idli’ की पहचान

डिप्रेशन से ड्रीम कैफे तक, इडली वाले किशन की जर्नी
छह महीने में बदली तकदीर
गोलगप्पे वाले का बेटा, अब ‘वाव इडली’ का मालिक
झारखंड के छोटे गांव से निकली बड़ी प्रेरणा

रिपोर्ट : संयुक्ता पंडित

मैथन : कहते हैं कि सपनों की उड़ान छोटी जगहों से ही शुरू होती है। धनबाद जिले के एक छोटे से गांव में पैदा हुए किशन तांती ने यह साबित कर दिया है कि हौसला और मेहनत किसी भी हालात को बदल सकती है। कभी 40 रुपये की दिहाड़ी कमाने वाले किशन आज अपने स्टार्टअप “वाव इडली” से महीने में पचास हजार रुपये तक कमा रहे हैं।

बचपन और तंगहाल हालात

किशन का बचपन बेहद संघर्षों से भरा था। पिता गली-मोहल्ले में गोलगप्पे बेचकर परिवार चलाते थे, मां घर संभालती थीं। आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि किशन को 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। जीवन की जिम्मेदारियां जल्दी ही उनके कंधों पर आ गईं। कभी कंपाउंडर बनकर 40 रुपये रोजाना की नौकरी की, तो कभी लैब असिस्टेंट बनकर दिन गुज़ारे। लेकिन जेब में पैसे हमेशा कम ही पड़ते थे।

कैमरे से किचन तक का सफर

जीवन सुधारने के लिए किशन ने कैमरा खरीदा और शादियों में फोटो-वीडियो शूट करने लगे। कुछ समय बाद उन्होंने यूट्यूब चैनल भी बनाया, लेकिन अचानक वह टर्मिनेट हो गया। स्टेशन पर खाना बेचने की कोशिश की, पर यह काम भी एक महीने से ज्यादा नहीं चला। लगातार असफलताओं और आर्थिक संकट ने उन्हें डिप्रेशन तक पहुंचा दिया, लेकिन यही वह दौर था जब परिवार और दोस्तों ने उनका हौसला बढ़ाया। दोस्तों की मदद और घरवालों के विश्वास ने उन्हें फिर से खड़ा किया। और यहीं से जन्म हुआ “वाव इडली” का।

इडली से मिली पहचान

साल 2025 की शुरुआत में किशन ने सिर्फ 3 से 5 हजार रुपये की छोटी सी इन्वेस्टमेंट से इडली का ठेला लगाया। शुरुआती दिनों में कमाई मात्र 2000 रुपये हुई, लेकिन छह महीने के भीतर यही बिजनेस 50 हजार तक पहुंच गया। किशन रोज अलग-अलग जगह इडली बेचने जाते हैं। लोग उनके आने का इंतजार करते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक उनकी इडली के दीवाने हो चुके हैं। खास बात यह है कि जहां आम रेस्टोरेंट में एक प्लेट इडली 50-60 रुपये में मिलती है, वहीं वाव इडली पर सिर्फ 20 रुपये में तीन पीस के साथ घर जैसी चटनी और सांभर मिलती है।

सोशल मीडिया का सहारा

किशन ने अपने सफर की झलक सोशल मीडिया पर डालनी शुरू की। धीरे-धीरे उनके वीडियो पर लाखों व्यूज आने लगे। आज उनके यूट्यूब और इंस्टा पर 20 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। एक बार तो उन्हें 3,500 प्लेट इडली का ऑर्डर मिला, जिससे 70 हजार रुपये की कमाई हुई। ऑर्डर इतना बड़ा था कि उनकी वेबसाइट ही क्रैश हो गई।

परिवार और दोस्तों का योगदान

किशन बार-बार कहते हैं कि इस सफर में उनके माता-पिता, भाई-बहन का बड़ा योगदान रहा है। मां गीता देवी और पिता अनिल तांती हमेशा उनके साथ खड़े रहे। इसके अलावा, हर समय और हर मुश्किल में दोस्त रितिक, गुड्डू, संदीप खड़े थे। आसिफ अली ने अपनी पूरी टीम के साथ एक वेबसाइट गिफ्ट की, जोकि मोगमा के रहने वाले हैं। वहीं, आयुष राणा और सुमित ने भी उनके सपोर्ट में हर वक्त रहे है। फेसबुक, यूट्यूब व इंस्टाग्राम के फॉलोअर्स का भरपूर प्यार मिला है। चटनी-सांभर बनाने में परिवार की मदद ने उनका बोझ हल्का किया।

सपनों की उड़ान

आज किशन का सपना सिर्फ ठेले तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि “वाव इडली” एक ब्रांड बने। उनका प्लान है कि वे कैफे खोलें, आसपास के युवाओं को रोजगार दें और आने वाले समय में पूरे भारत में फ्रेंचाइज़ी शुरू करें। किशन कहते हैं कि गर्मी हो, बरसात हो या ठंड… मैंने हर मौसम में इडली बेची। लोग हंसते थे कि इडली बेचकर क्या मिलेगा। लेकिन आज वही लोग ताली बजाते हैं। वह कहते हैं कि कभी अपने हाथ की बनी हुई यह स्वादिस्ट इडली हमें भी खिलाओ।

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