आयुष मलिक ने सुनाई मोहम्मद अली बनने की कहानी

बढ़ गया था BP, कांपने लगे थे हाथ, यूट्यूब वीडियो ने बदल दी सोच

उत्तर प्रदेश के शामली निवासी कारोबारी आयुष मलिक, जिन्हें अब मोहम्मद अली के नाम से जाना जाता है, अपने धर्म परिवर्तन को लेकर सुर्खियों में हैं। इस मुद्दे पर पहली बार खुलकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस्लाम स्वीकार करने का फैसला उन्होंने किसी दबाव, भय या किसी प्रकार के प्रलोभन में आकर नहीं लिया। उनके अनुसार यह निर्णय लंबे समय तक विभिन्न धार्मिक विषयों का अध्ययन करने, उन्हें समझने और गहराई से आत्ममंथन करने के बाद लिया गया था।

आयुष मलिक ने बताया कि इस फैसले तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि जब वह इस निर्णय के करीब पहुंचे तो मानसिक दबाव इतना बढ़ गया था कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ने लगा और कई बार हाथ भी कांपने लगे। इसके बावजूद उन्होंने जल्दबाजी नहीं की और लंबे समय तक विभिन्न पहलुओं को समझने के बाद ही अंतिम फैसला लिया।

कई साल पहले शुरू हुई थी जिज्ञासा

आयुष मलिक के अनुसार धर्म परिवर्तन का विचार अचानक नहीं आया था। उन्होंने बताया कि कई साल पहले उनके मन में अलग-अलग धर्मों और धार्मिक मान्यताओं को लेकर जिज्ञासा पैदा हुई थी।

इसी जिज्ञासा के चलते उन्होंने विभिन्न धार्मिक पुस्तकों को पढ़ना शुरू किया। उनका कहना है कि वह केवल एक धर्म तक सीमित नहीं रहे, बल्कि अलग-अलग विचारों को समझने की कोशिश करते रहे। इसी दौरान उनकी रुचि इस्लाम के बारे में जानने में भी बढ़ी।

उन्होंने बताया कि समय के साथ यह रुचि और गहरी होती गई और वह इस विषय पर लगातार अध्ययन करते रहे।

यूट्यूब वीडियो से मिली नई दिशा

आयुष मलिक ने बताया कि धार्मिक विषयों को समझने में इंटरनेट और यूट्यूब ने भी उनकी काफी मदद की। उन्होंने कहा कि उन्होंने कई वीडियो देखे, जिनमें अलग-अलग विषयों पर चर्चा की गई थी।

उनके मुताबिक कुछ वीडियो ने उन्हें ऐसे सवालों के जवाब दिए, जिनके बारे में वह लंबे समय से सोच रहे थे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल वीडियो देखकर उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया।

उनका कहना है कि ऑनलाइन जानकारी देखने के साथ-साथ उन्होंने किताबें भी पढ़ीं और कई विषयों पर खुद अध्ययन किया। इसके बाद ही उनकी सोच धीरे-धीरे स्पष्ट होती गई।

फैसला लेने से पहले रहा मानसिक दबाव

आयुष मलिक ने बताया कि धर्म परिवर्तन जैसा बड़ा फैसला लेना उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि जब वह अंतिम निर्णय के करीब पहुंचे तो मानसिक दबाव काफी बढ़ गया था।

उन्होंने बताया कि उस दौरान कई बार उनका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता था। उन्हें चिंता रहती थी कि उनके फैसले पर परिवार, रिश्तेदार और समाज किस तरह प्रतिक्रिया देंगे।

उनके अनुसार कई बार वह इतने तनाव में आ जाते थे कि उनके हाथ तक कांपने लगते थे। लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपने फैसले को लेकर जल्दबाजी नहीं की।

लंबे समय तक किया अध्ययन

मोहम्मद अली ने कहा कि उन्होंने कई वर्षों तक विभिन्न धार्मिक विषयों का अध्ययन किया। उन्होंने दावा किया कि यह फैसला किसी एक घटना या किसी एक व्यक्ति की बात से प्रभावित होकर नहीं लिया गया।

उनके मुताबिक उन्होंने लंबे समय तक अलग-अलग पहलुओं को समझने की कोशिश की और उसके बाद ही अपने जीवन से जुड़ा यह बड़ा निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि किसी भी महत्वपूर्ण फैसले तक पहुंचने के लिए समय की जरूरत होती है और उन्होंने खुद को वही समय दिया।

दबाव या लालच से किया इनकार

धर्म परिवर्तन की खबर सामने आने के बाद कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि कहीं इस फैसले के पीछे किसी प्रकार का दबाव या प्रलोभन तो नहीं था।

इन सवालों पर प्रतिक्रिया देते हुए मोहम्मद अली ने साफ कहा कि उन्होंने किसी दबाव, डर या लालच में आकर धर्म नहीं बदला।

उनका कहना है कि यह पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला था और उन्होंने अपनी समझ, अध्ययन और विश्वास के आधार पर यह कदम उठाया।

परिवार की प्रतिक्रिया को लेकर थी चिंता

आयुष मलिक ने बताया कि धर्म परिवर्तन का फैसला लेने से पहले उन्हें सबसे ज्यादा चिंता परिवार की प्रतिक्रिया को लेकर थी।

उन्होंने कहा कि परिवार किसी भी व्यक्ति के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और ऐसे फैसले का असर केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता।

इसी वजह से उन्होंने काफी समय तक इस विषय पर विचार किया और हर पहलू को समझने की कोशिश की।

आत्मचिंतन को बताया सबसे बड़ा कारण

मोहम्मद अली ने कहा कि इस पूरे सफर में आत्मचिंतन की भूमिका सबसे अहम रही। उनके मुताबिक उन्होंने अपने जीवन, विश्वास और धार्मिक सोच को लेकर लंबे समय तक विचार किया।

उन्होंने कहा कि किसी भी फैसले तक पहुंचने से पहले व्यक्ति को खुद से सवाल पूछने चाहिए और अपने मन की बात समझनी चाहिए।

उनका कहना है कि उन्होंने भी यही किया और उसी प्रक्रिया ने उन्हें अंतिम निर्णय तक पहुंचाया।

सामने आने के बाद बढ़ी चर्चा

जैसे ही धर्म परिवर्तन की जानकारी सार्वजनिक हुई, यह मामला चर्चा का विषय बन गया। सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

कई लोगों ने उनके फैसले का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने सवाल भी उठाए। हालांकि मोहम्मद अली ने कहा कि वह अपने फैसले को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं।

धार्मिक आस्था को बताया व्यक्तिगत विषय

उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था का विषय पूरी तरह व्यक्तिगत होता है। हर व्यक्ति को अपनी मान्यताओं और विश्वास के अनुसार निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।

उनके अनुसार उन्होंने भी अपने जीवन के लिए वही रास्ता चुना जिसे वह सही मानते थे।

उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति की आस्था उसके अपने विचारों और अनुभवों से जुड़ी होती है और उसी आधार पर वह निर्णय लेता है।

कई सवालों के जवाब तलाशे

मोहम्मद अली ने बताया कि उनके मन में लंबे समय तक कई सवाल रहे। उन्हीं सवालों के जवाब खोजने के लिए उन्होंने अध्ययन किया और विभिन्न स्रोतों से जानकारी जुटाई।

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया एक-दो दिन या एक-दो महीने की नहीं थी, बल्कि कई वर्षों तक चली। इसी दौरान उनकी सोच विकसित हुई और उन्हें अपने सवालों के जवाब मिले।

अपनी कहानी खुद बताई

धर्म परिवर्तन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली ने खुद सामने आकर अपनी कहानी साझा की है। उन्होंने बताया कि इस फैसले तक पहुंचने के पीछे कई वर्षों का अध्ययन, आत्मचिंतन और मानसिक संघर्ष शामिल रहा।

उनका कहना है कि उन्होंने किसी दबाव या लालच में नहीं बल्कि अपनी समझ और विश्वास के आधार पर यह फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि इस निर्णय तक पहुंचने का सफर आसान नहीं था, लेकिन लंबे समय तक सोच-विचार करने के बाद उन्होंने वही रास्ता चुना जिसे वह अपने लिए सही मानते थे।

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