Bokaro Thermal: बोकारो थर्मल के सेंट्रल मार्केट स्थित हनुमान मंदिर में मंगलवार का दिन पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंगा नजर आया। मंदिर के ऊपरी तल पर स्थापित भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की प्रतिमा के 16वें स्थापना दिवस पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ ऐसा माहौल बना कि हर ओर भजन, कीर्तन और जयकारों की गूंज सुनाई देती रही। पूरे दिन श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
24 घंटे तक चला अखंड हरि कीर्तन, भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु
स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित 24 घंटे के अखंड हरि कीर्तन ने पूरे आयोजन को विशेष बना दिया। कीर्तन मंडली द्वारा प्रस्तुत भजनों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक वातावरण से जोड़ दिया। मंदिर परिसर में देर रात तक हरिनाम संकीर्तन चलता रहा और श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ इसमें शामिल होते रहे। मंगलवार की संध्या आरती के साथ अखंड कीर्तन का विधिवत समापन हुआ, जिसके बाद भगवान को भोग अर्पित किया गया और उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद वितरित किया गया।

विशेष पूजा और हवन से हुआ स्थापना दिवस का मुख्य अनुष्ठान
इस धार्मिक आयोजन का प्रमुख आकर्षण वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुई विशेष पूजा और हवन रहा। यजमान बृज किशोर पासवान ने विधि-विधान के अनुसार पूजा-अर्चना कराई। श्रद्धालुओं ने भी हवन में आहुति देकर परिवार की खुशहाली और समाज में सुख-शांति की कामना की। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप संपन्न हुए इन अनुष्ठानों ने आयोजन को और अधिक गरिमामय बना दिया।
सजावट और व्यवस्था ने बढ़ाई आयोजन की भव्यता
स्थापना दिवस को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी और रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था। शाम ढलते ही मंदिर की साज-सज्जा श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए, जिससे पूरे कार्यक्रम का संचालन व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।
महावीर मंगल सेवा दल ने निभाई अहम जिम्मेदारी
पूरे आयोजन को सफल बनाने में महावीर मंगल सेवा दल की भूमिका सराहनीय रही। सेवा दल के सदस्यों ने पूजा व्यवस्था, श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन और प्रसाद वितरण की जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाई।
श्रद्धा, सेवा और सामाजिक एकता का बना संदेश
धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सामाजिक एकता और सेवा भावना का भी संदेश दिया। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं की बड़ी भागीदारी ने यह दिखाया कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।










