Delhi Assembly Winter Session 2026: दिल्ली की राजनीति में नया साल बड़ा धमाका लेकर आने वाला है। कल यानी 5 जनवरी 2026 से दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है। यह सत्र सिर्फ चार दिनों का होगा, जो 8 जनवरी तक चलेगा। लेकिन इन चार दिनों में सदन गर्माने वाले कई मुद्दे हैं। सबसे बड़ा मुद्दा है पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास के नवीनीकरण से जुड़ी CAG रिपोर्ट, जिसे भाजपा ‘शीश महल’ कहकर प्रचारित करती रही है। इसके अलावा दो और CAG रिपोर्ट पेश होंगी, जिनमें दिल्ली जल बोर्ड और सरकारी यूनिवर्सिटीज में अनियमितताओं की बात है। इन रिपोर्टों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा होने के पूरे आसार हैं।
सत्र की शुरुआत कैसे होगी?/Delhi Assembly Winter Session 2026
सत्र का पहला दिन उपराज्यपाल वीके सक्सेना के अभिभाषण से शुरू होगा। इसके बाद सदन में नियमित कामकाज चलेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह AAP के पुराने कार्यकाल की कई CAG रिपोर्ट सदन में रखेगी। सरकार का कहना है कि ये रिपोर्टें पहले दबाई गई थीं, अब जनता को सच पता चलेगा।

‘शीश महल’ क्या है और क्यों है विवाद?
‘शीश महल’ नाम भाजपा ने दिया है पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास को। यह 6 फ्लैग स्टाफ रोड पर स्थित बंगला है, जहां केजरीवाल मुख्यमंत्री रहते हुए रहते थे। आरोप है कि कोरोना काल में इस बंगले के नवीनीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। महंगे पर्दे, मार्बल, फर्नीचर और लग्जरी सामान लगवाए गए। भाजपा का कहना है कि यह जनता के पैसे का दुरुपयोग है। आम आदमी की पार्टी होने का दावा करने वाले केजरीवाल ने अपने लिए महल बनवाया।
अब CAG की रिपोर्ट में इस खर्च और अनियमितताओं की पूरी जांच है। रिपोर्ट पेश होते ही विपक्ष यानी AAP के नेता इसे राजनीतिक बदला बताएंगे, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार का सबूत कहकर हमलावर होगी। सदन में नारे, हंगामा और वॉकआउट की संभावना है।
अन्य CAG रिपोर्टों में क्या है?
सरकार तीन मुख्य CAG रिपोर्ट पेश करने वाली है:
- शीश महल रिपोर्ट: सीएम आवास के सौंदर्यीकरण और खर्च पर।
- दिल्ली जल बोर्ड रिपोर्ट: 2022 तक जल बोर्ड में हुई गड़बड़ियां और अनियमितताएं।
- उच्च शिक्षा रिपोर्ट: दिल्ली की सरकारी यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों में प्रशासनिक खामियां और भ्रष्टाचार।
कुछ सूत्रों के मुताबिक कुल पांच रिपोर्टें भी आ सकती हैं, जिनमें मोहल्ला क्लीनिक या अन्य योजनाएं शामिल हो सकती हैं। इन रिपोर्टों को लेकर मंत्री कपिल मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जनता को पता चलना चाहिए कि टैक्स के पैसे का कैसे दुरुपयोग हुआ।
प्रदूषण पर भी होगी बड़ी बहस
सत्र में सिर्फ भ्रष्टाचार ही नहीं, दिल्ली के जलते मुद्दे प्रदूषण पर भी खुली चर्चा होगी। सरकार खुद एक प्रस्ताव ला रही है। पिछले 20 सालों की वैज्ञानिक रिपोर्टें सदन में रखी जाएंगी। इसमें प्रदूषण के कारण, पिछली सरकारों की नाकामियां और भविष्य की योजना पर बात होगी। दिल्ली में सर्दियों में प्रदूषण चरम पर रहता है, पराली जलाना, वाहन और फैक्टरियां इसके बड़े कारण हैं। सरकार कह रही है कि पिछली AAP सरकार ने इस पर ठोस कदम नहीं उठाए। विपक्ष इसका जवाब देगा कि केंद्र की भाजपा सरकार जिम्मेदार है। यह मुद्दा भी सदन को गर्माए रखेगा।
राजनीतिक माहौल क्या कहता है?
2025 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने AAP को हराकर सत्ता हासिल की। चुनाव में ‘शीश महल’ बड़ा मुद्दा था। अब सत्ता में आने के बाद भाजपा अपना वादा पूरा कर रही है। AAP का कहना है कि ये रिपोर्टें पुरानी हैं और राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। नेता प्रतिपक्ष आतिशी और अन्य AAP विधायक सदन में जोरदार विरोध करेंगे।
दिल्ली की जनता इन रिपोर्टों का इंतजार कर रही है। अगर रिपोर्ट में बड़े खुलासे हुए तो AAP की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, अगर रिपोर्ट सामान्य रहीं तो भाजपा पर सवाल उठेंगे कि इतना हल्ला क्यों मचाया।
सुरक्षा और तैयारियां पूरी
सत्र को देखते हुए विधानसभा के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। प्रशासनिक तैयारियां पूरी हैं। सदन में शांतिपूर्ण बहस की उम्मीद है, लेकिन राजनीतिक गर्मी से हंगामा तय माना जा रहा है।
यह सत्र दिल्ली की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। जनता देख रही है कि नए साल में नेता क्या करते हैं – जनता के मुद्दे उठाते हैं या पुरानी लड़ाई लड़ते रहते हैं। कल से सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सब साफ हो जाएगा।










