Indore News: गर्भवती महिला के सुसाइड केस में 3 की जमानत खारिज, कोर्ट ने कहा गंभीर अपराध

Indore: इंदौर के आजाद नगर थाना क्षेत्र में 21 वर्षीय विवाहिता की आत्महत्या से जुड़े चर्चित मामले में सेशन कोर्ट ने तीन महिला आरोपियों को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि मामला गंभीर प्रकृति का है और जांच अभी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में जमानत देना न्यायहित में उचित नहीं माना जा सकता। कोर्ट के इस फैसले को मामले की जांच के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

आत्महत्या के बाद दर्ज हुआ था मामला

जानकारी के अनुसार, 15 जून 2026 को 21 वर्षीय मतांशा खान ने अपने घर में फांसी लगाकर जान दे दी थी। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर आजाद नगर थाना पुलिस ने 13 जुलाई 2026 को भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 80(2) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।

अब तक छह गिरफ्तार, तीन आरोपी अब भी फरार

पुलिस जांच के दौरान इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं तीन अन्य आरोपी अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। गिरफ्तार महिलाओं में जेबा, सोफिया और रूबीना शामिल हैं, जिन्होंने अपनी गिरफ्तारी के बाद सेशन कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की थी।

जमानत के लिए दिए गए ये तर्क

आरोपी पक्ष की ओर से अदालत में दलील दी गई कि जेबा सात माह की गर्भवती हैं, जबकि सोफिया तीन माह की गर्भवती हैं। वहीं रूबीना की एक वर्ष से भी कम उम्र की बच्ची है, जिसकी देखभाल का दायित्व उसी पर है। बचाव पक्ष का कहना था कि जेल में रहने से महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है, इसलिए उन्हें जमानत दी जानी चाहिए।

कोर्ट ने क्यों ठुकराई जमानत

दशम अपर सेशन न्यायाधीश यशवंत मालवीय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत आवेदन निरस्त कर दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि केस डायरी में आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री मौजूद है। इसके अलावा जांच अभी जारी है, इसलिए इस स्तर पर राहत देना उचित नहीं होगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल गर्भावस्था या छोटे बच्चे का होना स्वतः जमानत का आधार नहीं बन सकता।

सरकारी पक्ष ने जताई थी आशंका

सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष और फरियादी की ओर से जमानत का विरोध किया गया। उनका कहना था कि यदि आरोपियों को रिहा किया गया तो वे साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही फरार आरोपियों को मदद मिलने की भी आशंका जताई गई। अदालत ने इन तर्कों को महत्वपूर्ण मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया।

जांच पर रहेगी सबकी नजर

फिलहाल इस मामले में पुलिस की जांच जारी है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। जांच पूरी होने और आरोपपत्र दाखिल होने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। अदालत के इस आदेश के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

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