Raebareli AIIMS: दावों के बीच बदहाल एम्स की तस्वीर, हैंडवॉश से लेकर दवाओं तक संकट; ट्रामा सेंटर भी अधूरा

100 बेड का ट्रामा सेंटर अब तक पूरी तरह तैयार नहीं, डॉक्टरों की कमी से गंभीर मरीज लखनऊ रेफर; दवा और अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों की बढ़ रही परेशानी

Raebareli AIIMS: स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सरकार भले ही बेहतर व्यवस्थाओं के बड़े-बड़े दावे करती हो, लेकिन रायबरेली एम्स की जमीनी तस्वीर इन दावों पर कई सवाल खड़े करती नजर आ रही है। देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में शामिल एम्स में मरीजों को बुनियादी सुविधाओं से लेकर विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं तक कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मरीजों और तीमारदारों की शिकायतों के अनुसार एम्स के पुरुष और महिला बाथरूम में हाथ धोने के लिए हैंडवॉश जैसी सामान्य सुविधा तक कई जगह उपलब्ध नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जहां मरीजों की सेहत और संक्रमण नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण होना चाहिए, वहां बुनियादी स्वच्छता व्यवस्था कितनी प्रभावी है?

ट्रामा सेंटर पर भी सवाल

एम्स परिसर में ट्रामा सेंटर की बिल्डिंग तैयार होने के बावजूद 100 बेड की सुविधा अभी तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। लंबे समय से निर्माण और तैयारियों की प्रक्रिया चलने के बावजूद ट्रामा सेंटर के पूरी क्षमता से संचालित न होने से गंभीर मरीजों को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।

डॉक्टरों की कमी, गंभीर मरीज लखनऊ रेफर

एम्स में डॉक्टरों की कमी भी मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। गंभीर स्थिति वाले मरीजों को बेहतर और आवश्यक उपचार के लिए लखनऊ रेफर किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यदि गंभीर मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार के लिए दूसरे शहर भेजना पड़े तो एम्स की स्थापना का मूल उद्देश्य कितना पूरा हो रहा है?

छह काउंटर, दवा वितरण के लिए सिर्फ तीन चालू

दवाओं के लिए अमृत फार्मेसी में भी मरीजों को लंबी कतारों से गुजरना पड़ रहा है। बताया जा रहा है कि छह काउंटर होने के बावजूद फिलहाल केवल तीन काउंटर से दवा वितरण होने के कारण मरीजों की भीड़ बढ़ जाती है और उन्हें काफी समय लाइन में खड़ा रहना पड़ता है।

वहीं प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र पर पैरासिटामोल जैसी सामान्य दवा तक उपलब्ध न होने की शिकायत सामने आई है। मरीजों का कहना है कि एम्स के डॉक्टरों द्वारा लिखी गई कई दवाएं एम्स की अमृत फार्मेसी और जन औषधि केंद्र पर उपलब्ध नहीं मिलतीं, जिसके बाद उन्हें बाहर से दवा खरीदने की सलाह दी जाती है।

अल्ट्रासाउंड के लिए लंबी वेटिंग, बाहर जांच कराने की मजबूरी

अल्ट्रासाउंड की सुविधा को लेकर भी मरीजों की परेशानी कम नहीं है। अल्ट्रासाउंड के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता न होने की स्थिति में मरीजों को बाहर जांच कराने की बात कही जाती है। वहीं एम्स में अल्ट्रासाउंड की तारीख लंबे अंतराल के बाद मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। मरीजों का दावा है कि कई मामलों में लगभग एक साल तक की तारीख दी जा रही है।

सवाल यह नहीं कि एम्स कितना बड़ा है, सवाल यह है कि मरीज को सुविधा कितनी मिल रही है

रायबरेली एम्स को लेकर सवाल सिर्फ एक-दो व्यवस्थाओं का नहीं है। हैंडवॉश जैसी बुनियादी सुविधा, डॉक्टरों की कमी, अधूरा ट्रामा सेंटर, दवाओं की उपलब्धता, लंबी कतारें और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच के लिए मरीजों की परेशानी—ये सभी मुद्दे स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

अब देखना यह है कि एम्स प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन शिकायतों का संज्ञान लेकर व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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